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ऐसे करता है कम

ऐसे करता है कम

कोरोना से पहले भी ब्लैक फंगस की बीमारी होती थी। इसे म्यूकोरमाइकोसिस कहते हैं। तब ऐसे मरीज जो डायबिटीज की वजह से आईसीयू में एडमिट हो जाते थे, उनमें इसके लक्षण पाए जाते थे। तब भी इसका इलाज अम्फोटेरिसिन-बी से करते थे। तब इसके केस बहुत कम आते थे, तो ये दवा अस्पताल में मिल जाती थी, लेकिन दवाईयों की दुकान पर ज्‍यादात्तर उपलब्‍ध नहीं रहती थी। अब इसकी मांग बढ़ी है तो सरकार उत्पाद पर भी ध्यान दे रही है और इसे बेचने के लिए नियम भी बना दिए हैं, ताकि ब्लैक (कालाबाजारी) न हो सके।’

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ब्लैक फंगस के सबसे महत्वपूर्ण कारण

ब्लैक फंगस के सबसे महत्वपूर्ण कारण

ब्लैक फंगस का सबसे ज्यादा खतरा है, इन लोगों को होता है।

– अनियंत्रित डायबिटिज (Diabetes)

– टोसिलिजुमैब के साथ स्टेरॉयड का इस्तेमाल

– वेंटिलेशन पर रहने वाले मरीज और सप्लीमेंटल ऑक्सीजन लेना आदि शामिल हैं।

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Black Fungus का Amphotericin-B Injection सिर्फ इन लोगों को मिलेगा | Boldsky

 कपड़े के मास्क को हर दिन धोएं

कपड़े के मास्क को हर दिन धोएं

एक ही मास्क को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और उन्हें किसी नम स्थान पर भी नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे मास्क में फंगस लग सकता है। कपड़े के मास्क को हर दिन धोया जाना चाहिए और एन 95 मास्क को पांच दिन इस्तेमाल करने के बाद फेंक देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मास्क को बदल बदलकर पहना जाना चाहिए।

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