NDMC खोलने जा रही पहला आयुष अस्‍पताल, आयुर्वेद सहित इन चिकित्‍सा पद्धतियों से मिलेगा इलाज

नई दिल्‍ली. ऐलोपैथी के अलावा दूसरी चिकित्‍सा पद्धतियों में इलाज ढूंढ रहे लोगों को नए अस्‍पताल की सौगात मिलने जा रही है. मॉडर्न चिकित्‍सा पद्धति से अलग नई दिल्‍ली म्‍यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (NDMC) इलाके में पहला आयुष अस्‍पताल (Ayush Hospital) खोलने जा रही है. यह अस्‍पताल सरोजनि नगर इलाके में बनाया जाएगा. जिसमें आयुष के अंतर्गत आने वाली पांचों चिकित्‍सा पद्धतियों आयुर्वेद (Ayurveda), योग, प्राकृतिक चिकित्‍सा (Naturopathy), होम्‍योपैथी और यूनानी चिकित्‍सा पद्धतियों से इलाज किया जाएगा.

आयुष अस्‍पताल को लेकर एनडीएमसी में निदेशक आयुष डॉ. कमलेश गुप्‍ता ने न्‍यूज 18 हिंदी को बताया कि यह एनडीएमसी का पहला आयुष अस्‍पताल होगा. यहां आयुष अस्‍पताल में मिलने वाली सभी सुविधाएं तैयारी की जाएंगी. अस्‍पताल बनने को लेकर फैसला हो चुका है. अभी सरोजनि नगर (Sarojini Nagar) में जहां ये अस्‍पताल बनना है वहां पुनर्विकास हो रहा है और वहीं यह अस्‍पताल तैयार होगा.

अभी तक दिल्‍ली में आयुष की चिकित्‍सा पद्धतियों के कुछ सेंटर्स हैं जहां यूनानी, आयुर्वेद या नेचुरोपथी की थेरेपी दी जा रही हैं लेकिन उन्‍हें भर्ती नहीं किया जा सकता क्‍योंकि ये अस्‍पताल के साथ जुड़े हुए नहीं हैं.

अभी तक दिल्‍ली में आयुष की चिकित्‍सा पद्धतियों के कुछ सेंटर्स हैं जहां यूनानी, आयुर्वेद या नेचुरोपथी की थेरेपी दी जा रही हैं लेकिन उन्‍हें भर्ती नहीं किया जा सकता क्‍योंकि ये अस्‍पताल के साथ जुड़े हुए नहीं हैं.

डॉ. कमलेश कहती हैं कि मेट्रो स्‍टेशन और सरोजनि नगर मार्केट से हटकर सीजीएचएस कॉम्‍प्‍लेक्‍स के पास करीब 30 हजार स्‍क्‍वेयर फीट जगह इस अस्‍पताल के लिए चिह्नित की गई है. सबसे पहले करीब तीन साल तक आयुष मंत्रालय इस अस्‍पताल की देखरेख करेगा. इसके बाद इसे एनडीएमसी को हेंडओवर कर दिया जाएगा. हालांकि यह पूरी तरह फ्री होगा यह अस्‍पताल तैयार होने के बाद तय होगा लेकिन अगर कोई शुल्‍क रखा भी जाता है तो वह 50 रुपये से लेकर अधिकतम 300 रुपये तक होगा.

इन पांचों विधियों से होगा इलाज

इस अस्‍पताल में आयुर्वेद, योगा (Yoga), यूनानी पद्धति (Unani), प्राकृतिक चिकित्‍सा और होम्‍योपैथी (Homeopathy) से इलाज किया जाएगा. सभी चिकित्‍सा विधियों की अलग-अलग ओपीडी बनाई जाएगी जहां नियमित रूप से लोग अपने रोगों का इलाज करा सकेंगे. इसके अलावा इसमें इन पांचों विधियों के अंतर्गत आने वाली थैरेपीज जैसे आयुर्वेद में पंचकर्मा (Panchkarma), नेचुरोपैथी में हाइड्रो और एक्‍यूप्रेशर व एक्‍युपंक्‍चर आदि के लिए अलग-अलग थैरेपी सेंटर्स बनाए जाएंगे.

मरीजों को भर्ती करने के लिए होगी बेड्स की सुविधा

डॉ. गुप्‍ता बताती हैं कि चूंकि यह आयुष का अस्‍पताल होगा ऐसे में यहां बेड की सुविधा की जाएगी. अभी तक दिल्‍ली में आयुष की चिकित्‍सा पद्धतियों के कुछ सेंटर्स हैं जहां यूनानी, आयुर्वेद या नेचुरोपथी की थेरेपी दी जा रही हैं लेकिन उन्‍हें भर्ती नहीं किया जा सकता क्‍योंकि ये अस्‍पताल के साथ जुड़े हुए नहीं हैं. हालांकि अब आयुष अस्‍पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए बेड्स और वार्ड बनाए जाएंगे ताकि लकवा आदि के मरीज जिन्‍हें लगातार कई दिनों तक थेरेपी लेने की जरूरत पड़ती है वे अस्‍पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करवा सकें. हालांकि बेड की संख्‍या अभी तय नहीं है यह अस्‍पताल बनने के बाद तय होगा.

रिसर्च सेंटर और विशेष ओपीडी भी बनाई जाएगी

डॉ. कहती हैं कि इस अस्‍प्‍ताल के हिस्‍से में रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा. यही सभी चिकित्‍सा पद्धतियों का संयुक्‍त होगा और इसमें बीमारियों के अलावा इनके इलाजों को लेकर नए-नए रिसर्च होंगे. इसके साथ ही एक विशेष ओपीडी को भी चलाने की योजना है जिसमें किसी निश्चित बीमारी को लेकर सप्‍ताह में एक बार ओपीडी लगाई जाएगी और इसमें बाहर से विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा.

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