नई दिल्‍ली: फेसबुक (Facebook) के मालिकाना हक वाला मैसेजिंग ऐप व्‍हाट्सऐप (WhatsApp) भारत सरकार के नए आईटी नियमों (IT Rules) के खिलाफ  कोर्ट अदालत पहुंच गया है. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में व्हाट्सऐप ने कहा है कि इन नियमों से यूजर्स की निजता का उल्‍लंघन होगा. वहीं सरकार ने नए आईटी नियमों का बचाव किया है और कहा है कि इसमें किसी के निजता का हनन नहीं होता है.

1. क्या है सरकार और व्हाट्सऐप के बीच विवाद की जड़

सरकार और व्हाट्सऐप के बीच विवाद नए आईटी नियमों (IT Rules) की वजह से चल रहा है. दरअसल, 21 फरवरी 2021 को भारत सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नई गाइडलाइन लेकर आई और इन्हें लागू करने के लिए 25 मई तक का समय दिया. नए नियमों के अनुसार, व्हाट्सऐप और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भेजे और शेयर किए जाने वाले मैसेजेस के ओरिजनल सोर्स को ट्रैक करना जरूरी है. यानी अगर कोई गलत या फेक पोस्ट वायरल हो रही है तो सरकार कंपनी से उसके ऑरिजनेटर के बारे में पूछ सकती है और सोशल मीडिया कंपनियों को बताना होगा कि उस पोस्ट को सबसे पहले किसने शेयर किया था.

नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को किसी पोस्ट के लिए शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी. इसके लिए कंपनियों को तीन अधिकारियों (चीफ कॉम्प्लियांस ऑफिसर, नोडल कॉन्टेक्ट पर्सन और रेसिडेंट ग्रेवांस ऑफिसर) को नियुक्त करना होगा. ये अधिकारी भारत के ही रहने वाले होने चाहिए और इनका कॉन्टेक्ट नंबर सोशल मीडिया वेबसाइट के अलावा ऐप पर होना अनिवार्य है, ताकि लोग शिकायत कर सकें. इसके साथ ही अधिकारियों के लिए शिकायत का अपडेट देने के लिए 15 दिनों समयसीमा भी तय की गई है. कंपनियों को पूरे सिस्टम पर नजर रखने के लिए स्टाफ रखने को कहा गया है.

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2. नए नियमों से व्हाट्सऐप को क्या है दिक्कत

मैसेजिंग ऐप व्‍हाट्सऐप (WhatsApp) ने भारत सरकार के नए आईटी नियमों के तहत एन्क्रिप्टेड मैसेजेज तक पहुंचने की अनुमति मांगने को गलत और असंवैधानिक बताया है. व्हाट्सऐप का कहना है कि ऐसा करने के लिए उसे अपने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को तोड़ने की आवश्यकता होगी. दरअसल, नए नियमों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर किसी मैसेज को पहली बार भेजने वाले यानी फर्स्ट ओरिजनेटर को ट्रैक करने की मांग की गई है और व्हाट्सऐप पर यूजर्स को एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन मिलता है. एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन का मतलब है कि यूजर्स के चैट और कॉल्स को सेंडर और रिसीवर के अलावा कोई थर्ड पार्टी (यानी खुद व्हाट्सऐप) भी पढ़ या सुन नहीं सकती है. यही कारण है कि व्हाट्सऐप ट्रेसेबिलिटी (Traceability) (किसी मैसेज को ट्रेस करना) का विरोध कर रहा है.

3. ट्रेसेबिलिटी को लेकर व्हाट्सऐप ने दी सफाई

व्‍हाट्सऐप (WhatsApp) ने अपना पक्ष रखने और ट्रेसेबिलिटी (Traceability) को अपने यूजर्स को समझाने के लिए एक ब्लॉग शेयर किया है, जिसमें कंपनी ने बताया है कि ट्रेसेब्लिटी क्या है और व्हाट्सऐप क्यों इसका विरोध कर रहा है. कंपनी ने कहा, ‘सरकार टेक कंपनियों को यह पता लगाने के लिए कह रही कि प्राइवेट मैसेजिंग सर्विस पर किसी मैसेज को पहली बार किसने भेजा था. यही ट्रेसेबिलिटी (Traceability) कहलाता है. इससे एंड-टू-एंड इनक्रिप्शन टूटता है और निजता पर आघात होता है, क्योंकि किसी एक मैसेज को ट्रेस करने के लिए सारे मैसेजेस को ट्रेस करना होगा.’

कंपनी का कहना है, ‘ट्रेसेबिलिटी (Traceability) पूरी तरह से संभव नहीं है, क्योंकि अगर आप कोई इमेज डाउनलोड कर भेजते हैं या फिर आप कोई स्क्रीनशॉट लेकर सेंड करते हैं तो यह आपको मैसेज का मेन सोर्स बनाता है. कोई किसी मैसेज को कॉपी-पेस्ट कर आगे भेज रहा है तो वो व्यक्ति भी मैसेज का मेन सोर्स बन जाता है.’

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4. व्हाट्सऐप को केंद्र सरकार ने दिया जवाब

निजता के उल्लंघन को लेकर व्हाट्सऐप को केंद्र सरकार ने जवाब दिया है और कहा है कि हम यूजर्स की प्राइवेसी का सम्मान करते हैं, लेकिन देश हित के कई मामलो में मैसेज के सोर्स की जानकारी देनी पड़ेगी. सरकार का कहना है कि कानून व्‍यवस्‍था और फेक न्‍यूज पर लगाम लगाने के लिए नई गाइडलाइंस लाई गई है, हमारा यूजर्स की प्राइवेसी का हनन करने का कोई इंटेंशन नहीं है. केंद्रीय इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी मंत्रालय ने कहा, ‘व्‍हाट्सऐप को किसी मैसेज के ओरिजिन सोर्स के बारे में जानकारी तब ही देनी होगी, जब कोई गंभीर मामला हो जैसे महिलाओं के खिलाफ अपराध या जांच और सजा में इसकी जरूरत हो.’

5. सरकार क्यों लागू करना चाहती है ट्रेसेबिलिटी?

व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर सरकार के लिए कई बार परेशानी की वजह बन चुका है, क्योंकि एनक्रिप्शन की वजह से अफवाह और फेक शेयर करने वालों का पता नहीं चल पाता है. नए नियमों से भारत सरकार सुनिश्चित करना चाहती है कि व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स का गलत इस्तेमाल ना हो. इसकेसाथ ही फेक न्यूज, भड़काऊ मैसेज और अफवाहें फैलाने वालों को पकड़ा जा सके.

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