असम-मेघालय सीमा पर फिर भड़की हिंसा की आग, बार-बार क्यों होती है झड़प, आखिर क्या है विवाद की जड़; डिटेल में जानें

नई दिल्ली: असम-मेघालय सीमा पर एक बार फिर से हिंसा की आग भड़की है. असम के वेस्ट कार्बी आंगलोग जिले में असम-मेघालय सीमा पर कथित तौर पर अवैध लकड़ी ले जा रहे एक ट्रक को मंगलवार तड़के असम के वनकर्मियों द्वारा रोकने के बाद भड़की हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए. मृतकों में वन्यकर्मी भी शामिल हैं. दरअसल, सीमा से सटे जंगल से कुछ लोग ट्रक में अवैध रूप से लकड़ी भरकर ले जा रहे थे, तभी वन विभाग की टीम ने उन्हें मुकरोह के पास रोका तो मेघालय की ओर से भीड़ ने हमला कर दिया और इसके बाद हिंसा भड़क उठी और देखते ही देखते 6 लोग काल की गाल में समा गए. दरअसल, यह पहली बार नहीं है, जब असम-मेघालय सीमा पर हिंसा हुई हो. दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर विवाद काफी पुराना है और यह पिछले 50 सालों से चला आ रहा है. असम-मेघालय सीमा पर इसी विवाद को लेकर अक्सर हिंसा की खबरें आती रहती हैं.

50 साल से है सीमा विवाद
हालांकि, इसी साल जब असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अंतर्राज्यीय सीमा मुद्दों के समाधान के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, तब दावा किया गया था कि असम और मेघालय के बीच चल रहा 50 साल पुराना विवाद अब सुलझ गया. मगर ताजा हालात से ऐसा लग नहीं रहा कि असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद का मसला सुलझ गया हो. बता दें कि पिछले इसी साल जुलाई में भी असम और मिजोरम के पुलिस बलों के बीच हिंसक झड़प में छह लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद दोनों राज्यों ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए समितियों का गठन किया था.

क्या है असम-मेघालय का सीमा विवाद
दरअसल, असम और मेघालय 884.9 किलोमीटर लंबी सीमा शेयर करते हैं और दोनों के बीच 12 इलाकों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. क्योंकि दोनों राज्य इन इलाकों में अपना-अपना दावा करते रहते हैं, यही वजह है कि बार-बार इन इलाकों में झड़पें होती रहती हैं और दोनों राज्यों की पुलिस भी आमने-सामने आ जाती है. मेघालय 1972 में असम से अलग होकर एक राज्य बना था और इसने असम पुनर्गठन कानून, 1971 को चुनौती दी थी, जिससे 884.9 किलोमीटर लंबी साझा सीमा के विभिन्न हिस्सों में 12 इलाकों को लेकर विवाद पैदा हुआ था. विवाद वाले ये 12 इलाके हैं- ताराबारी, लांगपिह, बोरदुआर, गिजांग आरक्षित वन, बोकलापारा, हाहिम, नोंगवाह, मातमूर, खानापारा-पिलंगकाटा, देशदेमोराह ब्लॉक वन, ब्लॉक 2, रेटचेरा और खंडुली.

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लांगपिह जिला ही है विवाद की असल वजह
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, असम और मेघालय के बीच विवाद का एक प्रमुख बिंदु असम के कामरूप जिले की सीमा से लगे पश्चिम गारो हिल्स में लांगपिह जिला है. लांगपिह ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान कामरूप जिले का हिस्सा था लेकिन आजादी के बाद यह गारो हिल्स और मेघालय का हिस्सा बन गया. हालांकि, एक ओर जहां असम इसे अपने राज्य की मिकिर हिल्स (असम में स्थित कार्बी आंगलॉन्ग एरिया) का हिस्सा मानता है, वहीं दूसरी ओर मेघालय का कहना है कि यह क्षेत्र पहले यूनाइटेड खासी और जयंतिया हिल्स जिले में आते थे, इसलिए यह उनका हिस्सा है.

6 स्थलों पर विवावद को लेकर हुआ है समझौता
मंगलवार को असम और मेघालय की सीमा पर जो हिंसक झड़प हुई, वह इसे पश्चिमी गारो हिल्स क्षेत्र में बसे लांगपिह (मेघालय) में हुआ है. इस जिले की सीमा असम के कामरूप जिले से लगी हुई है और यही वजह है कि यहां अक्सर विवाद होता रहता है. बीते समय में असम और मेघालय दोनों ने सीमा विवाद निपटान समितियों का गठन किया. पहले चरण में छह स्थलों पर विचार किया गया, जो ताराबारी, गिजांग, हाहिम, बकलापारा, खानापारा-पिलिंगकाटा और रातचेरा हैं. असम और मेघालय ने इसी साल मार्च महीने में 12 में से उपरोक्त छह स्थानों पर अपने पांच दशक पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

असम का और किससे है विवाद
असम 2743 किलोमीटर सीमा मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और पश्चिम बंगाल से साझा करता है. उसका मेघालय के अलावा, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर से भी सीमा विवाद है. जुलाई 2021 में असम के कछार जिले में असम और मेघालय पुलिस के कर्मियों के बीच भीषण सशस्त्र संघर्ष हुआ था. असम पुलिस के छह कर्मी मिजोरम के पुलिसकर्मियों के साथ हुए संघर्ष में मारे गए थे, जिसके बाद केंद्र को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था.

Tags: Assam Mizaram Border issue, Assam news, Meghalaya

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