जम्मू-कश्‍मीर: ग्रामीण महिलाएं कर रहीं 'पैसों की खेती', सरकार की कोशिशों ने लाया रंग

हाइलाइट्स

700 बैग से शुरू हुई मशरूम की खेती अब इस साल 1000 बैग तक बढ़ चुकी है
मशरूम की खेती के लिए एक शेड के निर्माण के लिए 75000 रूपए की मदद भी दे रही सरकार

जम्मू. जम्मू-कश्मीर के हीरानगर (Heeranagar village) के सीमावर्ती गांव जंडी में महिलाओं ने महिला सशक्‍तीकरण के कदम के रूप में मशरूम की खेती को करना शुरू किया है. न्यूज़ एजेंसी ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां सीमावर्ती गांव जांडी में कृषि उत्पादन एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा मशरूम की खेती के लिए महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. गांव जांडी में वसुंधरा नाम से 20 महिलाओं का स्वयं समूह बनाया गया है, जिन्होंने मशरूम की खेती शुरू की. इस स्वयं सहायता समूह को एक वर्ष के भीतर मशरूम काफी तरक्की देखने को मिली है.

700 बैग से शुरू हुई मशरूम की खेती अब इस साल 1000 बैग तक बढ़ चुकी है. महिलाओं की सहायता के लिए कृषि विभाग सभी प्रकार की तकनीकी जानकारी प्रदान करता है, और साथ ही मशरूम की खेती के लिए एक शेड के निर्माण के लिए 75000 रुपए की मदद भी दे रहा है. सभी तरह की तकनीक और कुशलता की वजह से महिलाएं हर रोज करीब 50 से 70 किलो मशरूम का उत्पादन कर रही हैं. इन मशरुम का इन्हें अच्छा भाव भी बाजार में मिल रहा है.

आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं
एक महिला नीलम रानी ने कहा कि महिलाएं काम करना चाहती हैं और अपनी आजीविका कमाने के लिए आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि कृषि विभाग स्वयं सहायता समूह बनाने और मशरूम की खेती को बढ़ावा देने में उनकी मदद करता है. महिलाएं अपना समूह शुरू करके बहुत खुश हैं और यहां सामूहिक रूप से काम कर रही हैं. वे मशरूम की खेती से लेकर बाजार में बिक्री के लिए पैकिंग तक का सारा काम कर रहे हैं. अन्य महिलाओं को भी कृषि संबंधी कार्यों में शामिल होने के लिए स्वयं सहायता समूह में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. चूंकि घरेलू काम पूरा करने के बाद उनके पास कोई दूसरा काम नहीं है.

Tags: Farming in India, Jammu and kashmir

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