बच्चों में Corona का कैसे हो इलाज, सरकार ने जारी की गाइडलाइंस

नई दिल्ली: कोरोना की दूसरी लहर थोड़ी कम हो गई है. रोज के मामले 1 लाख से कम आ रहे हैं. हालांकि चिंता तीसरी लहर को लेकर बरकरार है. तीसरी लहर में भी ये चिंता बच्चों के प्रभावित होने को लेकर ज्यादा है. इसको लेकर तैयारी भी शुरू हो चुकी है, लेकिन दूसरी लहर में काफी बच्चों के कोरोना से संक्रमित होने की खबरें आई.

अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस ने बच्चों का कोरोना से कैसे इलाज किया जाए इस पर जरूरी गाइडलाइंस जारी कर दी गई है.

कोरोना संक्रमित बच्चों को रेमडेसिवर नहीं

नई गाइडलाइंस के मुताबिक, कोरोना संक्रमित बच्चों को रेमडेसिवर नहीं दें. साथ ही कोरोना संक्रमित बच्चों का CT स्कैन कम हो. बहुत जरूरी होने पर ही बच्चों का CT स्कैन करें. बच्चों में हल्के लक्षण पर स्टेरॉयड नहीं दें. बच्चों पर स्टेरॉयड का इस्तेमाल सावधानी से करें. इसके साथ ही कोरोना के एसिम्प्टोमेटिक बच्चों को दवाईयां नहीं दें.

6 मिनट का वॉक टेस्ट 

बच्चों की शारीरिक क्षमता जांचने के लिए 6 मिनट का वॉक टेस्ट करें. पैरेंट्स वॉक टेस्ट 12 साल से बड़े बच्चों का करें. इसके तहत बच्चे उंगली में पल्स ऑक्सीमीटर लगाकर 6 मिनट तक टहलें. 6 मिनट बाद ऑक्सिजन सैचुरेशन लेवल और पल्स रेट को मापें. इससे बच्चों में हैप्पी हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी का पता चल सकेगा.

मध्यम लक्षण होने पर ऑक्सीजन थेरेपी

इसके अलावा गाइडलाइंस में कुछ और अहम निर्देश दिए गए हैं. इसके मुताबिक, मामूली लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल दें. गले में खराश, कफ, खांसी होने पर बड़े बच्चों को गार्गल कराएं, जबकि मध्यम लक्षण होने पर ऑक्सीजन थेरेपी शुरू करें. बच्चे हमेशा मास्क पहनें, हाथ धोएं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें. साथ ही बच्चों को हमेशा पौष्टिक भोजन दें जिससे इम्युनिटी बेहतर रहे.

दूसरी लहर में ही काफी बच्चे संक्रमित हुए हैं और तीसरी लहर में बच्चों के ही सबसे ज्यादा संक्रमित होने की संभावना है. ऐसे में ये स्वास्थ्य मंत्रालय की ये गाइडलाइंस बेहद अहम हैं.

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