मोदी सरकार में भारत के प्राचीन मंदिरों को मिला दिव्य स्वरूप, सदियों बाद साकार हुआ सपना

केंद्र की मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है तभी से समस्त हिंदुस्तान के मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है. भारत के प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रतीक हैं, उनके स्तंभ हैं. हमारी संस्कृति को खत्म करने के लिए हजार साल से भी अधिक समय से विदेशी बर्बर आक्रांताओं ने हमारे मंदिरों पर हमले किए, उनमें तोड़फोड़ की और उन्हें खत्म करने की कोशिश हुई. इतिहास में ऐसे हजारों मंदिरों का जिक्र मिलता है जहां हमले करके उन्हें खत्म करने की कोशिश की गई क्योंकि उनका लक्ष्य था भारतीय संस्कृति के इन स्तंभों को खत्म करके भारतीय संस्कृति को खत्म करना, लेकिन वह मंदिरों में हमले करने के बाद भी भारतीय संस्कृति और उन मंदिरों को पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाए. अयोध्या, काशी, मथुरा और सोमनाथ इसका जीवंत उदाहरण हैं.

आजादी के बाद भी विपक्षी दलों की सरकारों ने हमारे मंदिरों की पवित्रता और उनकी ऐतिहासिकता बनाए रखने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए, लेकिन सनातन समाज द्वारा खुद से कई मंदिरों को उनकी वही दिव्यता वापस दिलवाने के लिए अनेकों कार्य किए गए. लेकिन गुजरात में 2002 के बाद से और समस्त भारत में 2014 के बाद से भाजपा सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों का निर्माण और जीर्णद्धार कर रही है. आज भारतीय संस्कृति का नवजागरण काल चल रहा है, जिसमें गुलामी और बर्बर मानसिकता के प्रतीकों को हटाकर ओजस्वी सनातन संस्कृति के स्तंभ रहे मंदिरों का भगवान के आशीर्वाद से पीएम मोदी के नेतृत्व में पुनरूद्धार हो रहा है.

करके दिखाया सनातन सभ्यता के प्रतीकों का उद्धार

500 साल बाद पावागढ़ के माता मंदिर में ध्वज पताका
पावागढ़ के माता मंदिर के ऊपर 500 साल बाद फहरा रहा शिखर ध्वज केवल हमारी आस्था और आध्यात्म का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि ये इस बात का भी प्रतीक है कि सदियां बदलती हैं, युग बदलते हैं, लेकिन आस्था का शिखर शाश्वत ही रहता है. आज से 500 साल पहले जहरीला और जिहादी मानसिकता का शासक महमूद बेगड़ा ने गुजरात के उस पवित्र मां काली के पावागढ़ मंदिर को तोड़ दिया था, जिसकी स्थापना ऋषि विश्वामित्र ने की थी और जिसका संबंध लव-कुश से रहा था. मां काली का यह मंदिर हिंदुओं की आस्था का केंद्र है क्योंकि यहां की मान्यता है कि यहां देवी सती का अंग गिरा है. इस मंदिर पर राक्षसी बेगड़ा के हमले से भी पहले कई हमले होते रहे हैं, लेकिन बेगड़ा ने हिंदुओं की आस्था को कमजोर और खत्म करने के लिए और उन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवाने के लिए मां के मंदिर के ऊपर दरगाह का निर्माण भी करवा दिया था. 500 साल बीत गए, लेकिन मां के मंदिर पर पताका नहीं दिखी क्योंकि मंदिर का शिखर खंडित हो गया था. हिंदूधर्म के अनुसार खंडित हुए शिखर पर पताका नहीं फहराई जाती. बेगड़ा के मंदिर विध्वंस करने के बाद खंडित शिखर पर ध्वज नहीं दिखा, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मंदिर के नवनिर्माण का कार्य किया गया. उस दरगाह को शिफ्ट किया गया और मंदिर के नवनिर्माण के बाद, शिखर को धर्म अनुसार सही करने के बाद देश के प्रधानमंत्री और गुजरात के बेटे नरेंद्र मोदी ने स्वयं वहां पहुंचकर मां के मंदिर पर जाकर मां काली के दर्शन किए और 500 साल बाद मंदिर के शिखर पर पवित्र पताका लहराई.

सोमनाथ मंदिर जैसे देश के पवित्र मंदिरों का भव्य विकास
गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर भी हर हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है, लेकिन मुस्लिम आक्रांताओं ने इस मंदिर पर भी बार-बार हमले किए और इस मंदिर को तोड़ा और लूटा. यह मन्दिर हिन्दूधर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है. मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सोमनाथ मंदिर को कई बार नष्ट किया और इस क्षेत्र के स्वदेशी शासकों द्वारा इसे फिर से बनाया गया. इस मंदिर को तोड़ने और हिंदुओं द्वारा फिर से उसे खड़ा करने का सिलसिला सदियों तक चला. वर्तमान में इस मंदिर का निर्माण गुजरात के गौरव और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले सरदार वल्लबभाई पटेल ने करवाया था. पीएम मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी सोमनाथ मंदिर का विकास लगातार होता रहा और अब नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बननेके बाद सोमनाथ मंदिर की दिव्यता और भव्यता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. हर गुजराती जानता है कि जब से गुजरात में भाजपा की सरकार बनी है, तभी से सोमनाथ मंदिर को लेकर भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी का हमेशा से खासा ध्यान रहा है.

वैसे एक दौर यह भी था जब सरदार पटेल सोमनाथ मंदिर के पुनःनिर्माण में ध्यान दे रहे थे और देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने नव सोमनाथ मंदिर के उद्धाटन समारोह में जाने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को रोकने की हर संभव कोशिश की थी. यहां तक की नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का विरोध तक किया. नेहरू ने खुद को सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार से पूरी तरह अलग रखा था. यहां तक की नेहरू ने सौराष्ट्र के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर सोमनाथ मंदिर परियोजना के लिए सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश तक दे दिया.

लेकिन आज देश के हर पवित्र मंदिरों के विकास में भाजपा की केंद्र और भाजपा की राज्य सरकार बढ़-चढ़ कर दिलचस्पी दिखा रही है और विकास कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है. पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर के नए सर्किट हाउस का हाल ही में उद्घाटन किया है, जिसकी लागत 30 करोड़ रुपये है. इस सर्किट हाउस में हर तरह की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. जैसे यहां वीआईपी और डीलक्स कमरे उपलब्ध होने के साथ ही सम्मेलन कक्ष और सभागृह भी मौजूद हैं. कमरों की बनावट ऐसी है कि वहीं से लोग समुद्र का नजारा भी देख सकते हैं. भगवान सोमनाथ के दर्शन करने के लिए विश्वभर से आनेवाले धार्मिक पर्यटकों को इस सर्किट हाउस के निर्माण से काफी लाभ होगा.

गुजरात के मंदिरों का विकास
गुजरात में सोमनाथ, चोटिला पावागढ़ के अलावा भी कई अन्य ऐतिहासिक मंदिर हैं जहां भाजपा सरकार ने विकास कार्यों को अंजाम दिया है. अंबाजी, गिरनार जैसे कई पवित्र तीर्थस्थलों को राज्य सरकार द्वारा विकसित किया गया है. जनहित में बलिदान देने वाले अमर शहीद वीर मेघमाया की याद में पाटण में 11 करोड़ रुपये की लागत से भव्य स्मारक का निर्माण भी किया जा रहा है. राज्य सरकार द्वारा 1008 संत शिरोमणि श्री त्रिकम साहेब के पवित्र तीर्थ चित्ररोड-रापार में 3 करोड़ से अधिक का अनुदान भी दिया है जिससे विकास कार्यों को अंजाम दिया जा सके. गुजरात सरकार आस्था के प्रति अपनी महत्वता प्रदर्शित करने के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत से केशरडी के संत श्री जोधालपीर स्टेशन को भी विकसित करवाने का कार्य कर रही है. जल्द ही यहां विकास कार्यों को शुरू किया जाएगा.

भाजपा सरकार द्वारा राज्य के सभी मंदिरों को एक समान नजर से देखा गया है. हर वर्ग, हर संप्रदाय के मंदिरों के विकास पर ध्यान दिया गया है. राज्य सरकार द्वारा अब तक अनुसूचित जाति के मंदिरों के विकास के लिए गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड के माध्यम से 45 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं. यह इस बात का साक्ष्य है कि हमारे लिए हर मंदिर हिंदुत्व और इस देश की संस्कृति का प्रतीक है. गुजरात पर्यटन बोर्ड ने अंबाजी, डाकोर, सोमनाथ, पलिताना सहित कई मंदिरों के लिए धन आवंटित किया है.

श्रवण योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक पर्यटन करने के लिए परिवहन किराए में 50 प्रतिशत तक की छूट दी गई है. संत नगरी में गौतम बुद्ध की प्रतिमा के रखरखाव के लिए 5.75 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. इसी के साथ संत नगरी के अन्य मंदिरों और धर्मस्थलों को लेकर भी भाजपा सरकार ने संजीदगी दिखाई और मंदिरों में विकास के कार्य करवाए. इसी के साथ सिर्फ हिंदूधर्म स्थल ही नहीं, बल्कि भाजपा सरकार ने यहूदी धर्मस्थल उदवाडा के लिए 10 करोड़ और कच्छ में गुरुद्वारे के लिए 5 करोड़ रुपये भी दिए हैं.

गुजरात की भाजपा सरकार ने राज्य के सभी पवित्र तीर्थों के विकास के लिए योजना बनाई है. अंबाजी तीर्थ को विकास के साथ जोड़ने के लिए भाजपा सरकार द्वारा सितंबर 2020 को विधानसभा में’अंबाजी क्षेत्र विकास और तीर्थयात्रा पर्यटन शासन विधेयक, 2020 पारित किया गया है. मां अंबाजी के भक्तों को सुविधा हो, अंबाजी धाम का विकास हो… इसके लिए अंबाजी यत्रधाम पर्यटन प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. इसके साथ ही अंबाजी तीर्थ का विकास कार्य किया गया है. साल 2008 मेंतत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1.6 करोड़ की लागत से 51 शक्ति पीठ परिक्रमा पथ का भी विकास करवाया जो कार्य साल 2014 में जाकर पूरा हुआ.

इसी के साथ राज्य सरकार द्वारा 51 शक्ति पीठों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया गया. भाजपा की सरकार ने भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका के विकास को भी हमेशा से महत्व दिया है. सरकार द्वारा द्वारका और पंचकुई को जोड़ने वाले सुदामा सेतु का निर्माण कार्य भी साल 2016 में पूरा हुआ है. इसके निर्माण में 7.5 करोड़ रुपये का खर्चा आया है. भाजपा सरकार के प्रयासों से गुजरात के पवित्र धार्मिक तीर्थों पर आनेवाले श्रद्धालुओं की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे जहां गुजरात में धार्मिकता बढ़ी है, तो वहीं यहां की अर्थव्यवस्था और लोकल टूरिज्म सेक्टर को
भी बड़ा लाभ पहुंच रहा है.

मंदिरों और सनातनी श्रद्धालुओं की सुरक्षा हुआ सुनिश्चित
मुगलों से भी पहले से हमारे देश के मंदिर मुस्लिम आक्रांताओं के निशाने पर रहे हैं. अफगानी, तुर्क, ईरानी, मंगोल बर्बर आक्रांताओं ने हमारे मंदिरों को कई बार तोड़ने की कोशिश की, लेकिन आज जब हम आजाद हैं तब भी हमारे मंदिर आतंक के निशाने पर ही रहे हैं. आज के आतंकवाद पिछली सदियों के वही बर्बर आक्रमणकारी हैं जो सनातन आस्थाओं के केंद्रों को तबाह करने के लिए भारत पर हमले करते थे. गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में हुए साल 2002 के आतंकी हमले, काशी के मंदिरों में हुए बम ब्लास्ट, जम्मू के रघुनाथ मंदिर में हुए हमले और साल 2005 में भगवान श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में हुए आतंकी हमले इस बात का गवाह हैं कि हमें आज़ाद भारत में भी अपने मंदिरों की सुरक्षा करनी पड़ रही है और आज भी आतंकवादियों के निशाने पर हमारे पवित्र मंदिर हैं. लेकिन साल 2002 के बाद से गुजरात के एक भी मंदिर में आतंकी अपने नापाक मंसूबों को अंजाम नहीं दे पाए क्योंकि तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात से आतंकियों का सफाया कर दिया था. साल 2014 में जब से नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली है, तभी से देश के मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है और आज बिना सुरक्षा की चिंता किए सनातन श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं.

राम मंदिर (अयोध्या)
अयोध्या में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ है, इसलिए अयोध्या हमेशा से ही सनातन परपंरा मेंआस्था का मुख्य बिंदु रही है. यहां स्थित भगवान श्रीराम के जन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर पर मुस्लिम आक्रांताओं ने हमले किए और मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया. ऐसे में कई सदियों से हिंदू भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की मांग कर रहे थे. विपक्ष ने कई बार खुले तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा देने के लिए भगवान श्रीराम का अपमान किया, उनके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करने की कोशिश की और अयोध्या में मंदिर निर्माण की मांग का विरोध किया, लेकिन भाजपा सरकार हमेशा से मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध और कटिबद्ध रही व मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन करती रही. भाजपा की सरकार में और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण के समर्थन में फैसला दिया, जिसके बाद भाजपा ने अपने वादे को निभाया और आज अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर भव्य और दिव्य भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका शिलान्यास खुद प्रधानमंत्री मोदी ने किया है. भाजपा ने देश से किया मंदिर निर्माण का वादा निभाया है.

काशी विश्वनाथ (काशी)
अयोध्या के बाद काशी भी हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थान रहा है. काशी के लिए कहा जाता है कि यह भगवान शिव के त्रिशुल पर टिकी हुई है. काशी में भगवान शिव, काशी विश्वनाथ ज्योर्तिलिंग के रूप में विराजमान हैं. सभी हिंदुओं के लिए पूजनीय काशी विश्वनाथ मंदिर पर भी मुगलों ने कई बार हमला किया और मंदिर को मस्जिद में बदल दिया गया. सदियों तक काशी विश्वनाथ शिवलिंग का अपमान और तिरस्कार होता रहा, लेकिन महानारी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ की फिर से स्थापना करके वहां छोटे से मंदिर की फिर से स्थापना करवाई. लेकिन आज प्रधानमंत्री नरद्रें मोदी के नेतृत्व में काशी कॉरिडोर का निर्माण किया गया है, जिससे भगवान काशी विश्वनाथ के दिव्य मंदिर की पहचान फिर से वही हो गई है, जो सदियों पहले मुगल आक्रमण से पहले हुआ करती थी. आज काशी विश्वनाथ मंदिर मजबूती के साथ खड़ा है और पूरे विश्व में अपनी चमक बिखेर रहा है. और यह प्रमाण दे रहा है कि जब-जब औरगंजेब जैसे कट्टरपंथी का जन्म होगा और ये आएंगे तो किसी ना किसी क्षेत्र में शिवाजी का जन्म होगा और अनेकों शिवाजी व राणा प्रताप इस देश में जन्म लेते रहेंगे. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है.

कृष्ण जन्मभूमि और बृज की कृष्ण लीलाएं
मथुरा और बृज भूमि हिंदुओं के लिए हमेशा से खास रही है क्योंकि मथुरा में जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो वहीं बृज में कृष्ण लिलाएं रची गई हैं. इस भूमि में भगवान श्रीकृष्ण का बचपन बीता है. मथुरा में मुगलों ने कई बार हमले किए और कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद का निर्माण किया. लेकिन सनातन राजाओं की बदौलत सदियों बाद उस स्थान के कुछ हिस्से में मंदिर का भी निर्माण हो सका. लेकिन आजादी के बाद की सरकारों ने जैसे अयोध्या, काशी को लेकर उदासीनता दिखाई… ठीक वैसी ही उदासीनता मथुरा को लेकर भी दिखाई. मथुरा और बृज को विकास से अछूता रखा गया और वहां के मंदिरों की दशा खराब होती गई, लेकिन पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानथ के नेतृत्व में आज मथुरा और बृज भूमि का विकास भी हो रहा है और वहां के मंदिरों को लगातार सरकारी सहायता दी जा रही है. आज मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से लेकर समस्त मंदिरों का वही प्राचीन दिव्य वैभव लौटाया जा रहा है, जो कभी सदियों पहले हुआ करता था. बृज के पूरे क्षेत्र में मंदिरों का संरक्षण किया जा रहा है और पूरे विश्व से आनेवाले धार्मिक पर्यटकों के लिए पूरे बृज में विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है. मथुरा का रंगोत्सव और कृष्ण जन्मोत्सव आज देश में किसी परिचय की मोहताज नहीं है.

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