राजस्थान: कांग्रेस के 91 विधायकों का इस्तीफा प्रकरण, HC ने विधानसभाध्यक्ष-सचिव से मांगा जवाब

हाइलाइट्स

कांग्रेस के 91 विधायकों ने समानांतर बैठक बुलाकर विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे थे इस्तीफे
न्यायपालिका और विधायिका के बीच ऐसे विवाद के मामलों में संविधान का अनुच्छेद 212 होता है अहम

जयपुर. कांग्रेस विधायकों (Congress MLA) के सामूहिक इस्तीफे के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष और सचिव से जवाब-तलब किया है. राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) की ओर से विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब मांगा गया है कि कांग्रेस के 91 विधायक-मंत्रियों के 25 सितम्बर 2022 को विधानसभा की सदस्यता से दिए गए इस्तीफों की क्या स्थिति है. बीते 25 सितंबर को कांग्रेस हाईकमान के आब्जर्वर यहां आए थे तब कांग्रेस के 91 विधायकों ने इसके समानांतर बैठक बुलाकर विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे सौंपे थे.

कांग्रेस के 25 सितम्बर को हुए इस्तीफा प्रकरण में जनहित याचिका दायर कर खुद उसकी पैरवी करने वाले उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि मेरे द्वारा न्यायलय में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर प्रसंज्ञान लिया गया है. अध्यक्ष और सचिव को नोटिस जारी किए गए हैं और अब पूरे मामले की न्यायालय में विवेचना होगी. अब पूरा मामला कोर्ट के रिव्यू में आ गया है. राठौड़ ने कहा कि याचिका में न्यायिक दृष्टान्तों को रखा है जिसमें विधानसभा के अनुच्छेद 190 (3)(2) को और रूल्स 173 (2) के तहत बात रखी है.

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पहले भी हुआ था विधायिका-न्यायपालिका के बीच विवाद
12वीं विधानसभा के दौरान न्यायपालिका के मामले को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी. सातवें सत्र के दौरान न्याय प्रशासन की मांग पर चर्चा में कुछ सदस्यों ने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली की आलोचना कर दी. लेकिन बाद में अध्यक्ष ने अमर्यादित टिप्पणियों को हटा दिया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी, जिस पर चर्चा में भाग लेने वाले चार विधायकों, मुख्यसचिव और विधानसभा के सचिव को नोटिस जारी हुए. 6 अप्रैल 2007 को भी विधानसभा अध्यक्ष ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें न्यायपालिका के कदम को विधायिका में दखल माना गया. यह निर्णय लिया गया कि नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया जाएगा.

मजिस्ट्रेट के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव
13वीं विधानसभा के तीसरे सत्र के दौरान 14 जुलाई 2009 को सदन की कार्यवाही में 8 पीएम नो सीएम को लेकर हुई गरमागरमी की खबर मीडिया में आने पर बाड़मेर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसे सीएम का अपमान मामते हुए चर्चा में भाग लेने वाले विधायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 500 और 509 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर जमानती वांरट पर तलब किया. इस पर भी विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ. 17जुलाई 2009 को विधानसभा ने मजिस्ट्रेट के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था.

Tags: Ashok Gehlot Government, Jaipur news, Rajasthan news in hindi, Rajendra Rathod

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