हिमाचल: नतीजे आने से पहले कांग्रेस में सीएम पद की दावेदारी का दौर, दिल्‍ली पहुंचे नेता

हाइलाइट्स

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस नेताओं को बहुमत की उम्‍मीद
पार्टी के अंदरूनी सर्वे के बाद सक्रिय हुए कांग्रेस नेता
दिल्‍ली में कर रहे दावेदारी, सीएम पद पर सबकी निगाहें

नई दिल्‍ली. हिमाचल प्रदेश में हुए चुनाव के नतीजे 8 दिसंबर को आएंगे और जाहिर होगा कि किस पार्टी को बहुमत मिला और उसके बाद प्रदेश के मुख्‍यमंत्री का नाम तय हो सकेगा, लेकिन कांग्रेस नेता अभी से सीएम पद के लिए दावेदारी करने में जुटे हुए हैं. दरअसल कांग्रेस के अंदरूनी सर्वे में कहा गया है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन रही है और 42 से ज्‍यादा सीटें जीतने का अनुमान है. इस रिपोर्ट के बाद तमाम बड़े नेताओं ने सीएम पद के लिए अपना नाम प्रोजेक्‍ट करना शुरू कर दिया है. कुछ नेताओं ने दिल्‍ली दरबार की गणेश परिक्रमा शुरू कर दी है तो कुछ दिल्‍ली के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और दावा पेश कर रहे हैं.

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार का सपना देख रहे नेताओं में से कैम्पेन कमेटी के मुखिया सुखविंदर सिंह सुक्खू दिल्ली में सभी बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, तो सबसे बड़ी दावेदार और पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य का भी दिल्ली को दावेदारी का संदेश भेज रहे हैं. हालांकि यह तो कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति हुई, पहली बात तो पार्टी को बहुमत मिले, उसके बाद विधायक/आलाकमान तय करेंगे कि किसकी लॉटरी लगेगी या फिर कोई अन्‍य ही बाजी मार जायेगा.  इसके लिए 8 दिसंबर का इंतजार करना होगा.

आइए जानते हैं कि हिमाचल के सीएम की रेस में कांग्रेस का कौन सा नेता कहां है.

पिछले 3 दशक में हिमाचल में कांग्रेस मतलब वीरभद्र सिंह ही रहा है. इस बार भी पार्टी ने वीरभद्र सिंह का चेहरा सामने रखकर ही चुनाव लड़ा है. ऐसे में उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह जो मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष हैं, वे मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में खुद को सबसे आगे मान रही हैं. पार्टी ने उनके विधायक बेटे विक्रमादित्य को दूसरी बार भी टिकट दिया है. हालांकि न तो प्रतिभा सिंह और ना ही विक्रमादित्य के पास प्रशासनिक अनुभव है और यह बात उनके खिलाफ जाती है.

हिमाचल में सबसे ताकतवर जाति राजपूत हैं जिसमें से एक नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रतिभा सिंह की दावेदारी के खिलाफ हैं और वह खुद मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक रहे हैं. वे कैम्पेन कमेटी के चैयरमैन हैं और आम परिवार से आते हैं, एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के भी अध्यक्ष रहे हैं. वह केंद्रीय नेतृत्व को तर्क देते हैं कि हर वक्त राज्य परिवार को ही मौका देना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है बल्कि उन जैसे आम परिवार से आने वाले व्यक्ति को एक बार मौका जरूर देना चाहिए.

राजपूत जाति की ही उम्मीदवार और राज परिवार से आने वाली डलहौजी की 6 बार की विधायक आशा कुमारी भी दावेदार हैं. आशा कुमारी छत्तीसगढ़ के नेता टीएस सिंह देव की सगी बहन हैं. कैबिनेट मंत्री रह चुकीं आशा कुमारी इस बार अगर विधानसभा पहुंचती हैं, तो ये सातवीं बार होगा. स्वाभाविक रूप से वो भी पूरे दमखम से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा जरूर कर रही हैं.

राजपूत नेताओं में सीएम पद को लेकर घमासान के चलते आलाकमान किसी ब्राह्मण नेता पर भी दांव लगा सकता है. ऐसे में चौथा विकल्प भी सामने है. दो ब्राह्मण नेताओं का नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं, पहला मुकेश अग्निहोत्री और दूसरा सुधीर शर्मा. हालांकि जातिगत राजनीति में ठाकुरों के मुकाबले ब्राह्मण को तरजीह दे पाना आलाकमान के लिए राजनीतिक रूप से मुश्किल का सबब बन सकता है. फिलहाल बीजेपी से राजपूत जयराम ठाकुर सीएम हैं.

हिमाचल प्रदेश में यदि कांग्रेस को स्‍पष्‍ट बहुमत मिल जाता है और वह सरकार बनाने की स्थिति में होती है तो वह किसी नए चेहरे को भी मौका दे सकती है. इसमें युवा महिला नेता को भी अवसर मिल सकता है. वहीं हिमाचल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर, कांग्रेस मेनिफेस्टो कमेटी अध्यक्ष धनीराम शांडिल का नाम भी सामने आया है.

Tags: Assembly election, Himachal Pradesh Assembly Election, Himachal Pradesh Congress

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