2024 Polls: BJP के लिए हिंदुत्व और यूसीसी होंगे तुरुप के इक्के, क्या करेंगे राहुल और केजरीवाल?

हाइलाइट्स

इस साल 9 राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव
सभी राजनीतिक पार्टियां मुकाबले को तैयार
साल 2024 में भी भारी दिख रहा ‘मोदी फैक्टर’

नई दिल्ली. अगर साल 2013 को मुड़कर देखा जाए तो, 8 साल चली मनमोहन सिंह की सरकार लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों को झेल रही थी. उस वक्त राजनीतिक बदलाव की बयार नजर आने लगी थी. और, लोग साल 2014 में विकल्प की तैयारी कर रहे थे. ठीक इसके एक दशक बाद सत्ताधारी पार्टी भी 8 साल से ज्यादा वक्त गुजार चुकी है. लेकिन, नरेंद्र मोदी की सरकार का भविष्य मनमोहन सिंह की पूर्व सरकार के ठीक उलट नजर आता है.

लोकसभा चुनाव के करीब-करीब 15 महीने पहले पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने पिछले साल उत्तर प्रदेश और गुजरात में ऐतिहासिक जीत दर्ज की. पीएम मोदी की लोकप्रियता के सहारे बीजेपी को इस साल 9 राज्यों में होने वाले चुनाव में भी जीत की आशा है. यह आशा इसलिए भी है क्योंकि, पीएम मोदी का चेहरा अपराजेय नजर आता है.

राहुल को 2019 में लगा था झटका
साल 2019 में राहुल गांधी पीएम नरेंद्र मोदी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थे. इस चुनाव में राहुल गांधी ने ‘रफाल घोटाले’ को जोर-शोर से मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे. इसके अलावा देश की जनता के एक बड़े हिस्से ने उनकी छवि ‘पप्पू’ यानी गैर-गंभीर राजनेता की बना डाली. चुनाव हारने के बाद राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद त्याग दिया.

गांधी की छवि बदलने की कोशिश
इस बार साल 2022 में शुरू हुई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से राहुल की छवि को पुनर्स्थापित किया जा रहा है. उनकी छवि एक ‘लाडले’ से ‘योद्धा’ में बदली जा रही है. वह योद्धा जिसने जनता को एक करने में करीब-करीब पूरा देश पैदल ही नाप दिया. कमलनाथ और भूपेश बघेल जेसै नेताओं ने पीएम मोदी के विरुद्ध राहुल गांधी को ‘प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार’ बताया है.

कांग्रेस के सपने के बीच खड़े केजरीवाल
कांग्रेस पूरी कोशिश कर रही है कि देश की जनता उसे स्वीकार करे, लेकिन चुनौतियों के इस क्षितिज पर एक और कड़ा प्रतिद्वंद्वी अरविंज केजरीवाल के रूप में खड़ा हो गया है. उनकी पार्टी को लगता है कि केजरीवार प्रधानमंत्री पद के लिए बेहतर विकल्प हैं. पंजाब में ऐतिहासिक जीत, गोवा और गुजरात में पार्टी का खाता खुलने के बाद ‘लोकसभा चुनाव’ आप के राष्ट्रीय राजनीति के सपने को या तो सच साबित कर देगा या पूरी तरह चकनाचूर कर देगा. ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस साल 9 राज्यों में होने वाले चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होंगे. इनमें आप का कोई जिक्र ही नहीं है.

इन राज्यों में मजबूत है कांग्रेस
हालांकि, इन राज्यों के चुनावों से यह नहीं कहा जा सकता कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में क्या होगा. बीजेपी और कांग्रेस इसे बड़े युद्ध से पहले का वॉर्म अप अभ्यास समझ रही है. कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कांग्रेस कल्पना कर सकती है कि साल 2018 की तरह यहां उसकी सरकार बन जाए. उस वक्त कांग्रेस के विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम कांग्रेस को गिरा दिया था. इन्हीं दो प्रदेशों में कांग्रेस का संगठन और कैडर मजबूत भी है. यहां डीके शिवकुमार और कमलनाथ जैसे नेता भी हैं.

बीजेपी को चुनाव जीतने की पूरी उम्मीद
इधर, राजस्थान को लेकर बीजेपी को पूरी उम्मीद होगी कि वह चुनाव जीत जाएगी. क्योंकि, राजस्थान में सीएम अशोक गहलात और सचिन पायलट के बीच तकरार जगजाहिर है. इसलिए यहां पंजाब जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. बीजेपी की नजर तेलंगाना पर भी है. वह वहां तगड़ी टक्कर दे सकती है. इसके अलावा बीजेपी को उत्तर भारत के राज्यों से भी जीत की उम्मीद है. वह छत्तीसगढ़ में भी साल 2018 में हुए भारी नुकसान को भरना चाहती है.

लोकसभा चुनाव में भारी दिख रहा ‘मोदी फैक्टर’
साल 2024 में भी ‘मोदी फैक्टर’ भारी दिखाई देता है. जनता विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव को अलग-अलग नजरिये से देखती है. यही कारण है कि साल 2018 में कांग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव तो जीत गई, लेकिन ठीक पांच महीने बाद इन्हीं राज्यों में 65 में से 62 लोकसभा की सीटें हार गई.

बीजेपी के लिए ये होंगे तुरुप के इक्के
इस साल के चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी ‘राष्ट्रवाद और हिंदुत्व’ बीजेपी का तुरुप का इक्का होंगे. बीजेपी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन को मुंहतोड़ जवाब देने, यूनिफॉर्म सिविल कोड और राम मंदिर दर्शन को मुख्य रूप से मुद्दा बनाएगी. इस साल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का वादा कर सकती है. बीजेपी शासित चार राज्यों में इसके लिए कमेटी भी बना दी गई है. इसके जरिये बीजेपी साल 2024 के पहले ही यूसीसी को लेकर जनता के मूड को भांप लेगी. इस तरह बीजेपी साल 2024 के पहले इसी साल अपने बडे़ युद्ध की तैयारियां कर लेगी.

Tags: Arvind kejriwal, Narendra modi, Rahul gandhi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *