Analysis: अमरिंद सिंह ने कांग्रेस से झगड़े के बाद कैसे खो दिया अपना गढ़?

पटियाला. पटियाला में कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amrinder Singh) के शाही निवास, मोती बाग पैलेस में पहुंचने पर सबसे पहली चीज जो आपको खटकती है, वो है खालीपन. जब अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे, तब महल के बाहर पुलिस का जमावड़ा था. बड़े-बड़े बैरिकेड्स लगे थे. इसके ऊपर जाने वाली लगभग पूरी गली को बंद कर दिया गया था. लेकिन सब बदल गया है. अब महल तक पहुंचना आसान है और केवल दो पुलिसकर्मी ही इसकी रखवाली कर रहे हैं.

कैप्टन के गढ़ सिर्फ शाही निवास में ही बदलाव नहीं दिख रहा है. बल्कि शहर के कई जगहों पर ऐसा ही मंजर है. जैसे ही News18.com ने शहरी और ग्रामीण मतदाताओं का मूड जानने की कोशिश की तो ये साफ हो गया कि पूर्व मुख्यमंत्री कठिन समय का सामना कर रहे है. किला रोड पटियाला में एक दुकानदार हरदीप सिंह ने कहा, ‘लगभग चार साल तक कैप्टन ने पटियाला के लिए कोई काम नहीं किया. फिर भी हम उन्हें वोट देते रहे. हमें उनसे भावनात्मक लगाव रहा है. लेकिन अब जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी है, तो उन्हें वोट देने का कोई मतलब नहीं है. वह हमारे किस काम का हो सकते है.’

जसप्रीत सिंह उनकी बातों से सहमत हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि कैप्टन ने गलती की।. उन्हें कांग्रेस के साथ रहना चाहिए था. मुझे नहीं लगता कि यहां कई लोग उन्हें वोट देंगे. सिद्धू को एक फायदा है. वो यहीं से हैं और वो सही मुद्दों को उठा रहे हैं और कोई भी उन पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकता है. क्या आपने कभी आप या अकालियों को उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते देखा है?’

ये स्पष्ट है कि कांग्रेस इस गुस्से या राय का इस्तेमाल अमरिंदर को हराने के लिए करना चाहती है. पार्टी में एक ही आशंका है कि क्या कैप्टन कृषि कानूनों को निरस्त करने का फायदा उठा कर उन्हें नुकसान पहुंचाएंगे. पंजाब चुनाव अब सीधी लड़ाई नहीं रह गई है. अकाली पूरी तरह से बाहर नहीं हुई है. भारतीय जनता पार्टी भले ही बड़ी दावेदार न हो लेकिन शहरी इलाकों में कुछ जमीन फिर से हासिल कर ली है. आम आदमी पार्टी आगे बढ़ रही है और जीत की उम्मीद कर रही है. कांग्रेस भले ही बंट गई हो लेकिन फिर भी कई उन्हें वोट देना चाहते हैं.

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बहुत से लोग मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर मोहित नहीं हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वो सिर्फ एक रबर स्टैंप हैं. प्रदेश में दिल्ली से प्रभारी चार सचिवों की मौजूदगी ने इस धारणा को और बढ़ा दिया है. पटियाला में ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री के पास कुछ नहीं है. जसप्रीत सिंह कहते हैं, ‘वह अच्छा आदमी है लेकिन कमजोर है.’ हम सरदारों को अपने नेताओं का मजबूत होना पसंद है. कैप्टन साहब के लिए यही काम किया. यह कुछ ऐसा है जो सिद्धूजी के काम आ सकता है. वो अपने एजेंडे के लिए अपने ही सीएम और पार्टी को लेते हैं.
पटियाला में कैप्टन के लिए शुरूआती पारी अच्छी नहीं रही. सबसे पहले, उनकी पत्नी जो यहां से सांसद हैं, उन्हें कांग्रेस ने अनुशासनात्मक नोटिस दिया है और संभावना है कि वह अंततः इस्तीफा दे सकती हैं. और अमरिंदर सिंह को एक शर्मनाक क्षण का सामना करना पड़ा जब उन्हें अपने मेयर के लिए समर्थन व्यक्त करने के लिए निगम परिषद कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया. कुछ के लिए, यह आने वाले दिनों के लिए ड्रेस रिहर्सल जैसा लगता है.

Tags: Amrinder singh, Punjab Assembly Election 2022

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