Exclusive Interview: मुख्तार अंसारी अभी सिर्फ 20% ही नेस्तनाबूद हुआ है: पूर्व DSP शैलेंद्र सिंह

रिपोर्ट : अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. ‘सरकार को चाहिए कि विशेषज्ञ अधिकारियों को मुख्तार अंसारी के सभी ठिकानों के बारे में पता लगाने का आदेश दे ताकि उसका आर्थिक साम्राज्य खत्म किया जा सके. किसी भी माफिया को नेस्तनाबूद करना हो तो उसकी आर्थिक ताकत सबसे पहले खत्म करनी चाहिए. माफिया अतीक अहमद को काफी हद तक खत्म किया गया है, लेकिन मुख्तार अंसारी का अभी उतना नुकसान नहीं हुआ.’ यह कहना है पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह का. यह वही जांबाज अफसर हैं, जिन्होंने अंसारी के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अधिनियम (Pota) लगाया था और मुलायम सिंह यादव सरकार में उन्हें खासी प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा था. न्यूज़18 लोकल ने सिंह के साथ खास बातचीत में अंसारी से जुड़े तमाम अहम पहलुओं के बारे में जाना.

पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने कहा मुख्तार अंसारी के शायराना बयान का सीधा संदेश है कि वह अब भी बेहद मजबूत स्थिति में है. सरकार की ओर से अभी तक उसका सिर्फ 15 प्रतिशत ही नुकसान हुआ है. वह अब भी करोड़ों में खेल रहा है. उसके सभी ठिकानों के बारे में सरकार को पूरी जानकारी नहीं है. उन्होंने इस पूरे मामले पर पड़ताल की तो पता चला है कि मुख्तार अंसारी का देश में और विदेशों में कारोबार फैला हुआ है. उसके पास अब भी 40 से 50 करोड़ रुपये आ रहे हैं.

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‘सरकार कहेगी तो इंटेल देंगे’

सिंह ने कहा उन्हें मुख्तार अंसारी के ज्यादातर ठिकानों के बारे में जानकारी है. जैसे अंडे और मछली के उसके कई कारोबार हैं. सरकार कहेगी तो ये जानकारियां सामने रखी जाएंगी. उन्होंने बताया योगी सरकार ने काफी हद तक उसकी कमर तोड़ी है, फिर भी बहुत कसर बाकी है.

सिंह ने कहा जब मुख्तार अंसारी को व्हीलचेयर पर देखते हैं, तो खुशी होती है. ‘कहते हैं न कि वक्त सबका आता है. इसका वक्त आ चुका है अब. मेरी 22 साल की नौकरी बची थी, पर इस्तीफे की वजह ही मुख्तार अंसारी था. अपने इस्तीफे में भी मैंने यही लिखा था कि अब माफिया बताएंगे कि हमें क्या करना है.’ उन्होंने कहा उस समय योगी आदित्यनाथ ने उनका और उनके परिवार का साथ दिया था. तब योगी ने कहा था जब वह सत्ता में आएंगे तो न्याय होगा और न्याय हुआ है.

18 साल पहले क्या हुआ था?

जनवरी 2004 को जब शैलेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के स्पेशल टास्क फोर्स की वाराणसी यूनिट के प्रभारी थे. उस वक्त कृष्णानंद राय और मुख्तार अंसारी के बीच गैंगवॉर में लखनऊ के कैंट इलाके में फायरिंग हुई थी. तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार ने यूपी एसटीएफ को इस मामले पर सक्रिय किया. एसटीएफ दोनों ही गुटों की सर्विलांस के जरिए मॉनिटरिंग कर रही थी. तभी एक कॉल में पता चला मुख्तार अंसारी किसी भगोड़े सिपाही से एक करोड़ में एलएमजी (लाइट मशीन गन) खरीदने की बात कर रहा था.

तब शैलेंद्र सिंह ने 25 जनवरी 2004 को वाराणसी के चौबेपुर इलाके में छापा मार दिया और मौके से बाबू लाल यादव और मुन्नर यादव को दबोचकर 200 कारतूस के साथ एलएमजी भी बरामद कर ली. सिंह ने खुद चौबेपुर थाने में क्राइम नंबर 17/ 04 पर आर्म्स एक्ट व क्राइम नंबर 18/ 04 पर पोटा के तहत मुख्तार अंसारी पर मुकदमा दर्ज कराया. सिंह के मुताबिक तब तत्कालीन सरकार की ओर से मुकदमा वापस लेने का दबाव बनने लगा.

सिंह बताते हैं इस केस में उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया कि 2004 में ही उन्हें नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय में तोड़फोड़ और मारपीट की शिकायत के मामले पर उन पर मुकदमा किया गया, उन्हें जेल भेजा गया. हालांकि मौजूदा योगी सरकार की पहल के बाद उनके मुकदमे खारिज हो चुके हैं.

Tags: Exclusive interview, Lucknow news, Mafia mukhtar ansari

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