Explainer : क्या होती है शीत लहर, क्यों इसे गंभीरता से लें, कब था 20 सालों का सबसे ठंडा दिन

हाइलाइट्स

जब तापमान सामान्य तापमान से कई डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाए तो शीत लहर की स्थिति बनने लगती है
शीत लहर अगर लंबी चले तो बहुत खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि ये तब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती है
शीत लहर के बनने की स्थितियां कई कारणों पर निर्भर करती हैं, इसमें हिमालय से आने वाली हवाओं से लेकर पश्चिम विक्षोभ तक है

दिल्ली और उत्तर भारत इस समय जबरदस्त शीत लहर के प्रकोप से गुजर रहा है. भारतीय मौसम विभाग ने आमतौर पर उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी कर रखा है. रेड का मतलब खतरा होता तो समझा जा सकता है कि जब शीत लहर में रेड अलर्ट जारी हो जाए तो स्थिति किस कदर गंभीर हो जाती है. इसमें मुख्य तौर पर आपको घर से कम बाहर निकलना चाहिए. वैसे शीत लहर जब भी चलती है तब उसकी कुछ खास वजहें भी होती हैं. अगर ये लंबा टिके तो मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है.

सवाल – शीत लहर की स्थिति कब बनती है, तापमान से इसका क्या रिश्ता है?
– जब ठंडी हवाएं तेज चलने लगती हैं और उसकी वजह से तापमान में ना केवल तेज गिरावट होती है और कोई भी चीज इसके असर से बहुत तेजी से ठंडी होने लगती है तो इसे शीत लहर कहा जाता है. हेल्थ के लिए ये बहुत खतरा मानी जाती है. आमतौर पर कह सकते हैं ठंड में न्यूनतम तापमान जब 10 डिग्री सेल्सियस से 4-5 डिग्री नीचे चला जाता है या 04 डिग्री सेल्सियस के पास पहुंच जाता है तो ये शीत लहर प्रकोप कहा जाता है.

सवाल – गंभीर शीत लहरी क्या होती है, जो हाहाकार मचा सकती है?
–  ये भी बहुत खतरनाक स्थिति होती है जबकि दिन का तापमान 02 डिग्री या इससे नीचे चला जाए. जब ठंड के मौसम में न्यूनतम सामान्य तापमान 10 डिग्री से 06-07 डिग्री गिरे तो ये जबदस्त शीत लहर होती है इसे सीवियर कोल्ड वेव भी कहा जाता है.

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कब कब ठंड से थर्राई दिल्ली और आसपास का एनसीआर. (न्यूज18 ग्राफिक्स)

सवाल – दिल्ली और उत्तर भारत में लंबी शीत लहरी कब पड़ी और इससे क्या खतरे हो जाते हैं?
–  दिल्ली और उत्तर भारत में फिलहाल जो शीत लहर चल रही है, वो पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा है. शीत लहर 10 जनवरी को छठे दिन में प्रवेश कर गई है. हालांकि मौसम विभाग का मानना है कि एकाध दिन में इससे राहत मिल सकती है और दिन का तापमान थोड़ा राहत देने वाला होगा. इससे पहले वर्ष 2001 में तापमान 00 तक गिरा था. वर्ष 2021 में भी तापमान 1.1 तक गिरा था लेकिन इसके शीत लहर का समय बहुत लंबा नहीं था, अलबत्ता ये भी 06 दिनों तक बना रहा. अबकी बार की शीत लहर की स्थिति कुछ गंभीर इसलिए है क्योंकि 05 दिनों में शीत लहर लंबी चली है और तापमान भी 02 डिग्री या इससे नीचे रहा है. इससे शरीर का प्रतिरोधक सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो सकता है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है.

सवाल – जब भी गंभीर या खतरनाक शीत लहर कई दिनों तक रहती है तब क्या क्या नुकसान हो सकते हैं ?
– शरीर का प्रतिरोधक क्षमता जवाब दे जाती है. मृत्यु तक हो जाती है
– मवेशी मरने लगते हैं
– शरीर ज्यादा कैलोरी की मांग करने लगता है
–  हाइपोथेरमिया जैसा गंभीर रोग हो जाता है, जो मृत्यु तक ले जा सकता है या गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है
–  फसल बर्बाद होती है, पौधे मरने लगते हैं.

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पिछले 20 सालों में दि्लली और एनसीआर ने कितने दिनों तक झेला शीत लहर की स्थिति. (न्यूज18 ग्राफिक्स)

सवाल – शीत लहर की स्थिति पैदा होने की मुख्य वजहें क्या होती हैं? 
– तापमान जब 04 डिग्री सेल्सियस या नीचे पहुंच जाए
– दिन के न्यूनतम तापमान के साथ अधिकतम सामान्य तापमान में भी खासी गिरावट हो जाए
–  बादल नहीं रहें – जब आसमान में बादल साफ रहते हैं तो ठंड के मौसम में शीत लहर की स्थिति आने के आसार बढ़ जाते हैं. दरअसल पृथ्वी से जो ऊष्मा और विकिरण उत्सर्जित होकर ऊपर पहुंचता है, वो बादल होने की स्थिति में परावर्तित होकर वापस धरती की ओर लौटता है और तापमान को बढ़ाता है लेकिन आसमान साफ होने पर ऐसा नहीं होता और तापमान गिरने लगता है.
– पश्चिम विक्षोभ – इस बार ये स्थिति देर से आई है. मध्य पूर्व सागर से पश्चिम विक्षोभ हवा में नमी लाता है और हवा के साथ बारिश जैसी स्थितियां भी पैदा करता है. इससे तापमान में गिरावट आने लगती है. दिसंबर में पश्चिम विक्षोभ की स्थिति देर से आई, इसी वजह से दिसंबर का पहला पखवाड़ा आमतौर पर शुष्क और कम ठंड वाला था लेकिन इसके देर से आने से दिसंबर के आखिरी सप्ताह से मौसम ने तेजी से पलटा खाया और मौसम ठंडा होने लगा.
– अन नीनो की वजह से – प्रशांत महासागर की स्थितियों से पैदा होने वाली अन नीनो की स्थिति दुनियाभर के मौसम पर असर डालती है. ये जटिल मौसमी घटना होती है, इसकी वजह से भी ठंड बढ़ती है.

सवाल – देश के कौन से इलाके गंभीर शीत लहर के क्षेत्र में माने जाते हैं?
–  उत्तर भारत के मैदानी इलाके इसमें ज्यादा आते हैं. इसमें पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिसा और तेलंगाना वाले इलाके आते हैं लेकिन आमतौर पर उत्तर भारत के राज्य इसकी जद में ज्यादा आते हैं. अब भी जब उत्तर भारत और मध्य भारत में ठंड ज्यादा महसूस की जा रही है तो दक्षिण भारत उससे कमोवेश अछूता है. वहां मौसम काफी बेहतर है. ठंड की स्थिति नहीं है.

सवाल – पिछले 20 सालों में दुनिया का सबसे ठंडा दिन कौन सा था?
– 08 जनवरी 2006 का दिन 20 सालों में दिल्ली और उत्तर भारत में सबसे ठंडे दिन के तौर पर रिकॉर्ड किया गया, तब दिल्ली का पारा 0.2 पर पहुंच गया था. उस दिन में दिल्ली और उत्तर भारत में तेज बर्फीली उत्तर पश्चिमी हवाएं चल रहीं थीं. हालांकि दिन का अधिकतम तापमान 18.7 रहा, धूप खिली होने से लोगों को कुछ राहत मिली.

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