Explainer : क्या होते हैं वीआईपी कैदियों के लिए जेल के कायदे कानून और सुविधाएं

हाइलाइट्स

जेल में वीआईपी कैदियों के लिए क्या होता है मैन्युअल क्या मिलती हैं सुविधाएं
क्या खाना और कमरे में क्या सुविधाएं मिलनी चाहिए ऐसे कैदियों को
गृह मंत्रालय ने समिति की सिफारिशों के आधार पर 2003 में मॉडल जेल मैनुअल तैयार किया था

मनी लांड्रिंग मामले में जेल में बंद दिल्ली के सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का जो नया वीडियो सामने आया है, उसमें वह होटल का खाना खाते नजर आ रहे हैं तो एक शख्स उनका पैर दबा रहा है. इस वीडियो में दावा किया गया है कि उन्हें खाने के भी विशेष डिब्बे दिए जा रहे हैं. अब ये तो नहीं मालूम कि जेल में सत्येंद्र जैन का स्टेटस वीआईपी कैदी का है या नहीं. हालांकि जेल के मेन्युअल के अनुसार कोई मंत्री अगर आर्थिक अपराध के मामलों में जेल में बंद है तो उसे वीआईपी कैद माना जा सकता है. जेल नियमावली ये भी बताती है कि जेल में अंडरट्रायल कैदियों के लिए नियम कायदे हैं.

जानते हैं कि ये नियम कायदे क्या हैं. वैसे तिहाड़ जेल से सत्येंद्र जैन का वीडियो रिलीज होने के बाद कोर्ट ने जेल प्रशासन से पूछा है कि ये कैसे लीक हुआ. कोर्ट ने यहां साफ कहा कि जेल प्रशासन सत्येंद्र जैन को वो भोजन उपलब्ध कराए जो अंडरट्रायल कैदियों को दिया जाता है. अगर वह उपवास या व्रत पर हैं तो दिल्ली जेल नियम, 2018 के मुताबिक नियम 339, 341 और 1124 के अनुसार व्रत का जैन खाना दिया जाए.

आमतौर पर जब भी कोई विधायक, सांसद, मंत्री या बड़ा उद्योगपति जेल में जाता है और अगर वह  आर्थिक अपराध के मामलों में अंडरट्रायल है तो खुद के सुपीरियर या वीआईपी होने की बात कहते हुए उन सुविधाओं की मांग करता है, जो जेल में मैन्युअल में उन्हें अलग से दी गई हैं.

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सवाल – सुपीरियर क्लास होता क्या है?

सुपीरियर क्लास के अंतर्गत आने वाली सुविधाओं में बंदी को एक मेज, एक चौकी, अखबार, सोने के लिए लकड़ी का तख्त, दरी, कॉटन की चादर, मच्छरदानी, एक जोड़ी चप्पल, कूलर, बाहर का खाना, जेल के अदंर भी खाना अलग से बनवाया जा सकता है आदि की सुविधाएं दी जाती हैं.  वहीं एक आम बंदी को खाने के लिए एक प्लेट और एक गिलास दिया गया है. सोने के लिए दरी, कम्बल दिया जाता है.

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केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेख ने सत्येंद्र जैन के वायरल वीडियोज को लेकर निशाना साधा है लेकिन ये बात सही है कि टीवी समेत कुछ सुविधाएं जो जैन को जेल में मिल रही हैं वो उसके हकदार हैं.(ANI)

 सवाल – वीआईपी कैदी कौन होते हैं?

कैदियों को उनके विश्वास पर अपनी सामाजिक स्थिति और आर्थिक प्रोफ़ाइल के आधार पर ‘वीआईपी स्थिति’ के लिए आवेदन करने का अधिकार है. आम तौर पर वीआईपी कैदी के लिए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, संसद सदस्य (एमपी), राज्य विधायक के सदस्य, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष / उप-वक्ताओं, मौजूदा सांसद / विधायकों और न्यायिक मजिस्ट्रेट को चुना जाता है. ज्यादातर दोषी राजनेताओं के लिए यह विशेष स्थिति प्राप्त करना बेहतर रहने-खाने की व्यवस्था कर लेने का प्रवेश द्वार है.

सवाल – कैसी होती हैं वीआईपी सेल, क्या है उनका उद्देश्य?

भारत में जेलों में वीआईपी सेल का उद्देश्य हमेशा अन्य कैदियों से वाआईपी अभियुक्तों की रक्षा करना और जेल के बाकी हिस्सों से अलग करना है. सरकार इन सेलों की अधिक सुरक्षा और बेहतर रख-रखाव पर खर्च करती है.

जेल अधिनियम, 1894 और मॉडल जेल मैनुअल

भारतीय संविधान के जेल अधिनियम के मुताबिक, किसी भी जेल अधिकारी को कैदी को कुछ बेचने या इसके उपयोग की इजाजत देने से लाभ प्राप्त नहीं होना चाहिए. इसी तरह, जेल की आपूर्ति के लिए किसी भी अनुबंध में अधिकारी को कोई दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए; न ही वह जेल की ओर से या किसी कैदी से संबंधित किसी भी चीज की बिक्री या खरीद से कोई लाभ प्राप्त करेगा.

सवाल – सत्येंद्र जैन बाहर से खरीदकर कोई सामान मंगवा सकते हैं

जेल अधिनियम इसकी इजाजत नहीं देता. वह कहता है कि अगर कैदी कोई सामान प्राप्त करता है, पास रखता है या इधर से उधर करता है तो अधिनियम इसे दंडनीय अपराध मानता है. कई मामलों की सूचना मिली थी जिसमें कैदियों को सेल फोन का उपयोग करते पाया गया था. कानूनी इसकी मंजूरी नहीं देता है. हालांकि जेलों का प्रशासन राज्य सरकारों के अधीन आता है, यह जेल अधिनियम है जिसकी नियम पुस्तिका के रूप में पालन किया जाता है.

सवाल – मॉडल जेल मैनुअल क्या है

प्रत्येक राज्य में जेल कानून, नियम और विनियमों को बदलने का अधिकार रखने वाले राज्य सरकार के साथ अपने जेल मैनुअल हैं. गृह मंत्रालय ने समिति की सिफारिशों के आधार पर 2003 में मॉडल जेल मैनुअल तैयार किया था, जिसे जेलों के प्रबंधन और कैदियों के इलाज को नियंत्रित करने वाले कानूनों की समीक्षा के लिए स्थापित किया गया था. मैनुअल यह सुनिश्चित करती है कि कैदियों की “मूलभूत न्यूनतम आवश्यकताएं” जो मानव जीवन की गरिमा के अनुकूल हैं, उन्हें मिलनी चाहिएं.  लेकिन यह कठोर कारावास काट रहे राजनेताओं या अभिनेताओं को अलग से कोई छूट नहीं देता.

वो कैदी जिन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट मिला?

पूर्व तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जयललिता की गिरफ्तारी एक मामला है. असमान संपत्ति मामले में दोषी, जयललिता ने बैंगलोर सेंट्रल जेल में वीआईपी सेल में रहीं. जेल में पांच अन्य वीआईपी सेल कोशिकाएं भी हैं.  इन वीआईपी जेलों में एक बार कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और जी जनार्दन रेड्डी और एसएन कृष्णिया सेटी जैसे अन्य पूर्व मंत्री भी रहे हैं.

पंजाब में, बीबी जागीर कौर, जिन्हें उनकी बेटी के अपहरण के लिए दोषी ठहराया गया था, को कपूरथला जेल में शाही उपचार मिला. एक वीडियो फुटेज से पता चला कि जेल अधिकारियों ने जेल में आने पर उसे बधाई देने के लिए कैसे पहुंचे. 2जी घोटाले के दोषी कनिमोझी या राष्ट्रमंडल खेलों के घोटाले के अपराधियों को भी वीआईपी उपचार मिला था.

अमर सिंह को तिहाड़ जेल में वीआईपी कैदियों की सबसे अच्छी देखभाल मिली थी. माना जाता है कि घर से पके हुए भोजन और यूरोपीय शौचालय तक मिला था. चारा घोटाले के मामले में दोषी होने के बावजूद लालू प्रसाद यादव को तिहाड़ जेल में वीआईपी कैटेगरी का ट्रीटमेंट मिला.

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अमर सिंह को तिहाड़ जेल में वीआईपी कैदियों की सबसे अच्छी देखभाल मिली थी. माना जाता है कि घर से पके हुए भोजन और यूरोपीय शौचालय तक मिला था.

सलमान खान को घर का खाना खाने की अनुमति थी

मेगास्टार सलमान खान को भी घर से खाना खाने की अनुमति थी और उन्हें अधिकारियों के साथ कुर्सी पर भी बैठे देखा गया था, जबकि अधिकारी खड़े थे.

सवाल – क्या इन पर कभी सवाल भी उठे हैं

2014 में दिल्ली की तिहाड़ जेल के सिक्योरिटी वार्ड में बंद 175 कैदी सात दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे थे. जेल के आईजी व पुलिस कमिश्नर को भेजी शिकायत में कैदियों ने आरोप लगाया है कि जेल अधिकारियों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, गोपाल कांडा, यूपी के बाहुबली सांसद धनंजय कुमार और मनु शर्मा जैसे वीवीआईपी कैदियों को रिश्वत लेकर वीवीआईपी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं.

सवाल – क्या विशेषाधिकार के तहत पैसा देकर सुविधाएं पाई जा सकती हैं

तिहाड़ जेल में कैद सहारा इंडिया परिवार प्रमुख सुब्रत राय ने 57 दिनों के विशेषाधिकारों के लिए 31 लाख रुपये का भुगतान किया था. इनमें एक वातानुकूलित कमरा, पश्चिमी शैली के शौचालय, मोबाइल फोन, वाई-फाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं शामिल थीं. रॉय की कंपनी का बिल एक दिन में 54,400 रुपये आया था. क्योंकि उन्होंने अदालत में कहा था कि अगर उन्हें ये सुविधाएं जेल में नहीं मिलीं तो उनके रोजाना के कारोबार पर असर पड़ेगा.

Tags: AAP, Central Jail, Satyendra jain, Tihar jail

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