Himachal Cabinet: हिमाचल की सियासत में ‘सुक्खूगिरी’, हाईकमान समेत सभी गुटों पर पड़े भारी!

हाइलाइट्स

अकेले शिमला संसदीय क्षेत्र से सीएम ने 5 मंत्री और 3 मुख्य संसदीय सचिव बनाए.
कांगड़ा से केवल एक मंत्री और दो सीपीएस बने हैं.

शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) में राजभवन में रविवार को कैबिनेट मंत्रियों की शपथ के साथ ही हिमाचल की सियासत में सुक्खूगिरी की झलक देखने को मिली. कैबिनेट मंत्रियों और मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) को देखकर लग रहा है कि सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (CM Sukhvinder Singh Sukhu) पार्टी हाईकमान समेत अन्य सभी गुटों भारी तो पड़ गए, लेकिन विद्रोह की चिंगारी को भी हवा दे गए.

दरअसल, शनिवार शाम को शिमला स्थित राज्य सचिवालय के गलियारों से जैसे ही ये खबर निकली कि रविवार को आधा दर्जन से ज्यादा विधायक कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister) के रूप में शपथ लेंगे. वैसे ही ये उम्मीद भी बढ़ गई थी कि 28 दिनों की जद्दोजहद के बाद देर रात तक उन विधायकों के नाम सामने आ जाएंगे, जो सुक्खू कैबिनेट का हिस्सा होंगे, लेकिन मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने अपने पत्ते नहीं खोले. रविवार सुबह तक मुख्यमंत्री ने किसी को नहीं बताया कि वो चेहरे कौन हैं. सुक्खू की चुप्पी ठीक वैसी ही थी जैसे वो कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर चुप रहते थे और अचानक बड़ा फैसला करते थे.

केवल दो लोगों को लेकर चलते है

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यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में वो जिस तरह से अपने खासमखास एक दो आदमी को साथ लेकर जाते, वैसे ही कुछ मुख्यमंत्री बनने के बाद नजर आए. दिल्ली में आम नेता की तरह आते-जाते रहे. मुख्यमंत्री के साथ जो ताम-झाम होता है, वो दिल्ली में नजर नहीं आया. काम करने का स्टाइल बता रहा है कि संगठन के बॉस की तरह ही वो सत्ता भी चलाएंगे. इस तरीके से सत्ता चल पाएगी या नहीं, ये अभी भविष्य के गर्भ में है. जिन मंत्रियों को शपथ दिलवाई, उनमें आलाकमान की पसंद से कर्नल धनी राम शांडिल को जगह दी. हौली लॉज के समर्थक में रूप में केवल चंद्र कुमार ही शपथ ले पाए. विक्रमादित्य का नाम तो पहले से ही तय था.

हॉली किसका कर रहा था विरोध

7 में से अपने उन करीबियों को जगह दी जो हर सियासी मोड़ पर उनके साथ रहे, जिसने सवाल उठाए उन्हें चुप करवा दिया. शिमला जिले में भीतरखाने हॉली लॉज रोहित ठाकुर और अनिरूद्ध सिंह के विरोध में था. उनके स्थान पर विधायक नंद लाल और मोहन लाल ब्राक्टा की पैरवी की जा रही थी, लेकिन सुक्खू नहीं माने और अपने चेहेतों को मंत्री बना दिया. मुख्य संसदीय सचिव बनाने में भी सुक्खू का दबदबा रहा है. अपने सबसे प्रिय साथी संजय अवस्थी की कैबिनेट में जगह नहीं बनी तो उन्हें मुख्य संसदीय सचिव बना दिया. 6 सीपीएस में से 3 सीपीएस सुक्खू ने अपनी पसंद के बना दिए.

सियासी नफे-नुकसान का गणित

अब बात सियासी नफे-नुकसान और विरोध की चिंगारी की कर लेते हैं. सुक्खूगिरी कहीं भारी न पड़ जाए, इसकी झलक शपथ समारोह में ही दिख गई. कई चेहरे मायूस थे तो कुछ चेहरों की चुप्पी आने वाले तूफान की खामोशी का अहसास दिलवा रहे थे. कुछ विधायकों ने शपथ समारोह से ही किनारा कर दिया. रही सही, कसर सुधीर शर्मा और राजेश धर्माणी ने पूरी कर दी. शनिवार रात 9 बजे से पहले सुधीर शर्मा और राजेश धर्माणी कैबिनेट की कतार में खड़े थे, लेकिन सुबह होते-होते दोनों उस पंक्ति के साथ साथ समारोह से भी बाहर हो गए. दोनों की मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे. दोनों का समारोह में न आना खतरे की घंटी है. इनकी नाराजगी कैसे दूर की जाएगी, फिलहाल ये दूर की कौड़ी है, हालांकि कैबिनेट की 3 कुर्सी अभी खाली हैं.

कैबिनेट में क्षेत्रीय असंतुलन

मुख्यमंत्री कह तो रहे हैं कि मेरिट के आधार पर मंत्रियों की चयन हुआ है पर जो क्षेत्रीय असंतुलन दिख रहा है, उसको नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है. जिलावार देखें तो जिस कांगड़ा जिले की जनता ने 15 में से 10 सीटें कांग्रेस की झोली में दी वहां से केवल एक विधायक को कैबिनेट में जगह दी गई, वो भी इसलिए कि उनका कद बहुत ऊंचा है और जातिगत समीकरण को भी साधते हैं. दो विधायकों को सीपीएस बनाकर संतुलन की कोशिश की जरूर है, पर वो नाकाफी है. कांगड़ा में राजपूतों के पास वोट बैंक है, लेकिन उनके हिस्से भी केवल इंतजार ही आया है. हमीरपुर जिले से मुख्यमंत्री हैं, ऊना से उप मुख्यमंत्री, शिमला जिले को 3 मंत्री मिले और एक सीपीएस मिला, सिरमौर को एक मंत्री, सोलन को एक मंत्री और 2 सीपीएस, किन्नौर जिले को मंत्री मिला…वो भी एसटी कोटे से. लाहौल-स्पीति, बिलासपुर और मंडी जिले की झोली खाली है, कुल्लू जिले के हिस्से में एक सीपीएस आया है. चंबा जिले के हिस्से में केवल स्पीकर का पद आया है.  संसदीय क्षेत्रों की बात करें को अकेले शिमला संसदीय क्षेत्र से सीएम ने 5 मंत्री और 3 मुख्य संसदीय सचिव बनाए हैं. ऐसे में आने वाले समय में असंतोष पैदा हो सकता है. कांगड़ा से केवल एक मंत्री और दो सीपीएस बने हैं.

Tags: Himachal Assembly Elections, Himachal Cabinet Meeting, Himachal pradesh, Himachal Pradesh Assembly Election

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