INSIDE STORY: 2 साल पहले मोदी कैबिनेट में 1 पद की बात पर नाराज हुए थे नीतीश, इस बार क्‍यों माने?

पटना: मोदी मंत्रिमंडल का बुधवार को विस्तार किया गया है. इसमें 16 राज्यों से करीब 4 दर्जन मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. 

इस मंत्रिमंडल विस्तार में अगर बिहार (Bihar) के लिहाज से बात की जाए तो कुछ सवाल निकलकर सामने आते हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2019 में जिस बात को लेकर नीतीश (Nitish Kumar) इतने गुस्से में थे कि उन्होंने अंतिम वक़्त पर मंत्रिमंडल का ऑफर ठुकरा दिया. फिर पिछले 25 महीने में ऐसा क्या हुआ कि वो उसी पर मान गए, जिसे उन्होंने पहले ठुकरा दिया था. दरअसल 2019 में हालात कुछ और थे और 2020 के बाद कुछ और हैं. 

बिहार चुनाव के नतीजों ने बदली भूमिका

विधानसभा चुनाव के नतीजों ने बड़ा भाई, छोटा भाई का खेल बदल दिया. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) बिहार में छोटे भाई हो गए और बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में आ गई. राम चंद्र प्रसाद सिंह (RCP Singh) किसी भी हालत में केंद्र में मंत्री चाहते थे. वहीं नीतीश RCP Singh के साथ ही ललन सिंह को मंत्री बनवाना चाहते थे. इन सबके बीच बीजेपी सांकेतिक भागेदारी के अपने फॉर्मूले पर अडिग थी.

आखिर में नीतीश कुमार को बीजेपी के उसी फार्मूले को मानना पड़ा. दूसरी तरफ चिराग पासवान (Chirag Paswan) को सबक सिखाने के लिए भी नीतीश कुमार ने इससे समझौता किया. दरअसल जैसे ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा शुरू हुई. लोक जनशक्ति पार्टी से चिराग पासवान का मंत्री बनना तय हो गया था क्योंकि बीजेपी पहले ही बोल चुकी थी कि LJP से उसका भले बिहार (Bihar) में गठबंधन ना हो लेकिन केंद्र में वो सहयोगी है. 

नीतीश के इशारे पर तोड़ दी गई LJP

जैसे ही चिराग का नाम मंत्री पद के दावेदारों की सूची में सामने आया, नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने ऑपेरशन LJP शुरू कर दिया. उन्होंने अपने सारे सिपहसलारों को इस काम में लगा दिया गया.JDU के जो नेता LJP के नेताओं के संपर्क में थे, उन सभी को दिल्ली कैंप कराया गया. नीतीश कुमार और पशुपति पारस की गुप्त बैठक भी हुई. तय हुआ कि LJP के बंगले में आग लगा दी जाए. मतलब उसके 6 में 5 सांसदों ने गुपचुप तरीके से पार्टी तोड़ दी.

बीजेपी ने भी दी मौन सहमति?

बीमार चिराग पासवान (Chirag Paswan) कुछ समझ पाते, उससे पहले ही खेल हो चुका था.नीतीश कुमार के इस ऑपेरशन में बीजेपी की भी मौन सहमति थी. दरअसल पार्टी नहीं चाहती थी कि चिराग के कारण बिहार (Bihar) सरकार पर कोई खतरा आ जाए. ऐसी आशंका थी कि अगर चिराग को केंद्र  में मंत्री बनाया जाता तो नीतीश कुमार किसी भी हद तक जा सकते थे. बिहार में सरकार अस्थिर होती तो यूपी चुनाव में इसका गलत संदेश जाता और विपक्ष को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल जाता. लिहाज़ा नीतीश यहां जीत तो गए लेकिन केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अधिक सीट लेने की उसकी इच्छा धरी की धरी रह गई. 

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पूरी नहीं हुई नीतीश की उम्मीद

यही नहीं, मान के चला जा रहा था कि JDU के हिस्से रेल मंत्रालय आएगा. इसकी वजह ये थी कि क्योंकि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के रेल मंत्री रहते RCP Singh उनके PS( personal secretary) थे. मतलब RCP Singh को रेल मंत्रालय में काम करने का अच्छा अनुभव है. इसके बावजूद उन्हें इस्पात मंत्रालय दिया गया. फिलहाल चिराग पासवान बिहार की सड़कों पर जनता के बीच हैं और उनके चाचा पशुपति पारस दिल्ली के AC दफ्तर में हैं. 

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