Joshimath Sinking: जोशीमठ-औली रोपवे पर बढ़ा खतरा, 6 फीट गहरी दरारें आईं

नीतिन सेमवाल

जोशीमठ. उत्तराखंड में जोशीमठ  (Joshimat) में आपदा की जद में अब औली रोपवे (Auli Ropeway) भी जद में आ गया है. जोशीमठ से औली को जोड़ने वाले रोपवे में दरार आ गई है. न्यूज 18 ने मौके का जायजा लिया और मौके के हालात की पड़ताल की. रोपवे का संचालन फिलहाल बंद है, लेकिन अब एशिया के सबसे बड़े इस रोपवे पर भी खतरा मंडरा गया है.

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की रात को एशिया की सबसे लंबी रोपवे के पूरी बिल्डिंग और इलाके में दरार देखी गई हैं. 6 फीट गहरी और 6 इंच चौड़ी ये दरार हैं, पहले से ही रोपवे डेंजर जोन में था, लेकिन उसके बिल्डिंग के आसपास दरार नहीं थी, लेकिन अब दरार पड़ने के बाद रोपवे भी असुरक्षित हो गया है. बता दें कि एक बार इस रोपवे पर 22 लोग सफर करते हैं.

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रोपवे संचालन के प्रबंधक दिनेश भट्ट ने बताया कि पहले रोपवे में दरारें नहीं आई थी, लेकिन शाम को ही दरारें देखी गई हैं. छह फीट गहरी और छह इंच चौड़ी ये दरारें हैं. उन्होंने बताया कि रोपवे को लेकर रोजाना रिपोर्ट भेजी जाती है और अब दरारों की रिपोर्ट भी हायर अथॉरिटी को भेजी जाएगी.

राज्य के मुख्य सचिव सुखबीर सिंह संधु का कहना है कि साल 1976 में भी जोशीमठ में थोड़ी जमीन धंसने की बात सामने आई थी. जोशीमठ में पानी निकलने के बारे में पता करने के लिए विभिन्न संस्थान जांच में लगे हैं. विशेषज्ञ जोशीमठ में सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं और उनकी रिपोर्ट आने के बाद यह मामला राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा और उसके आधार पर ही कोई निर्णय किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जोशीमठ में आई आपका प्राकृतिक है.  मुख्य सचिव ने कहा कि अब तक जो रिपोर्ट के अनुसार, जोशीमठ के नीचे कठोर चट्टानें नहीं हैं और इसलिए वहां भूधंसाव हो रहा है. जिन शहरों के नीचे कठोर चट्टानें हैं, वहां जमीन धंसने की समस्या नहीं होती है.

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