Measles Outbreak: मुंबई में खसरा की चपेट में सैकड़ों बच्चे, डॉक्टर से जानें इससे बचने के आसान तरीके

हाइलाइट्स

खसरा छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा अपना शिकार बनाता है.
कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों को इसका ज्यादा खतरा होता है.

Know All About Measles: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इन दिनों खसरा (Measles) का प्रकोप देखने को मिल रहा है. अब तक 220 से ज्यादा बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं और 10 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. खसरा के मामले बढ़ने से देशभर के पैरेंट्स की टेंशन बढ़ने लगी है.खसरा कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन यह संक्रमित बच्चों से अन्य बच्चों में तेजी से फैल जाती है. यही वजह है कि इससे बचाव करना बेहद जरूरी होता है. अगर बच्चे को खसरा हो जाए तो सही इलाज करना चाहिए, वरना कंडीशन गंभीर हो सकती है. कई मामलों में खसरा जानलेवा साबित हो जाता है. आज एक्सपर्ट से जानेंगे कि खसरा क्या है. इसके कारण और लक्षण क्या होते हैं. साथ ही इससे बचाव और इलाज के बारे में भी जानेंगे.

क्या होता है खसरा?

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत के मुताबिक खसरा (measles) एक वायरल इंफेक्शन है, जिससे संक्रमित होने पर छोटे बच्चों को बुखार, खांसी, स्किन पर लाल रैशेज होना और नाक बहने की समस्या हो जाती है. यह बीमारी वायरस की वजह से होती है और संक्रमित बच्चे से अन्य बच्चों में तेजी से फैल जाती है. इससे संक्रमित होने के बाद 7 से 14 दिनों के अंदर लक्षण नजर आने लगते हैं. आमतौर पर इस इंफेक्शन की चपेट में छोटे बच्चे आते हैं, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले वयस्क भी खसरे का शिकार हो सकते हैं. खासतौर से टीबी या अन्य एलर्जी से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए.

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जानें खसरा के प्रमुख लक्षण

– तेज बुखार आना
– अत्यधिक खांसी
– त्वचा पर लाल रैशेज होना
– आंखें लाल होना
– ज्यादा थकान रहना
– नाक बहना
– गला खराब होना
– मसल्स में दर्द होना
– मुंह में परेशानी होना
– रोशनी से चौंध लगना

खसरा का इलाज और बचाव के तरीके

डॉ. सोनिया रावत कहती हैं कि खसरा का इलाज अक्सर लक्षणों के आधार पर किया जाता है. जिन बच्चों में जैसे लक्षण नजर आते हैं, उसी के अनुसार दवा दी जाती है. खसरा से संक्रमित होने के करीब एक सप्ताह बाद लक्षण दिखना शुरू होते हैं. इस बीमारी के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. लापरवाही बरतने से यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है. अगर बचाव की बात करें तो एक साल ज्यादा उम्र के बच्चों को खसरा की वैक्सीन लगवानी चाहिए और उन्हें संक्रमित बच्चों से दूर रखना चाहिए. बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए बेहतर डाइट देनी चाहिए. मजबूत इम्यूनिटी वाले बच्चों को खसरा होने का कम खतरा होता है.

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