Opinion: पीएम मोदी ने हर मंच पर अपनी बात बहुत मजबूती से रखी और दुनिया ने सुनी भी

युद्ध, महामारी, पर्यावरण संकट और गिरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच फंसी दुनिया भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है तो इसके कुछ बेहद मज़बूत कारण भी है. वैश्विक घटनाक्रमों पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान और एक प्रधानमंत्री के तौर पर उनका प्रदर्शन आज पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. दुनिया में मोदी होने का मतलब जानने के लिए बीते कुछ दिनों में हुए घटनाक्रम को समझना होगा.

विश्व भर में डंका
बुद्ध और गांधी के देश भारत ने हमेशा पूरी दुनिया को मानवता और अहिंसा का पाठ पढ़ाया है. आज रूस-यूक्रेन युद्ध के बहाने रूस और अमेरिका आमने सामने हैं तो चीन ताइवान संघर्ष के कारण चीन-अमेरिका आमने-सामने दिख रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दी हुई शान्ति की सीख का डंका हर तरफ बज रहा है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तो बाकायदा संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा है कि आज का समय युद्ध का नहीं है. यह समय हमारे सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए है.”

वहीं अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रपति जो बाइडन के सबसे भरोसेमंद जेक सुलिवन ने भी प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा वह सही और न्यायपूर्ण है कि यह युद्ध का समय नहीं है.” मोदी उस अमेरिकी मीडिया में भी छाये हुए हैं जिसका रुख अक्सर भारत विरोधी रहता है. ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने हेडलाइन लगाई ‘यूक्रेन में युद्ध को लेकर मोदी की पुतिन को फटकार’ तो न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन थी “प्रधानमंत्री भारत ने पुतिन से कहा कि अब युद्ध का युग नहीं”. दिलचस्प बात ये है कि खुद पुतिन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात में प्रधानमंत्री मोदी की कही बात को बहुत सकारात्मकता से लेते हुए जवाब दिया कि “मैं यूक्रेन में संघर्ष पर आपकी स्थिति और आपकी चिंताओं के बारे में भी जानता हूं. हम चाहते हैं कि यह सब जल्द से जल्द खत्म हो. वहां क्या हो रहा है, हम आपको इसकी जानकारी देते रहेंगे.”

राष्ट्र प्रथम
प्रधानमंत्री मोदी की सभी नीतियों का केंद्र “देशहित सर्वोपरि” रहा है और विदेश नीति के मूल में भी यही है. बीते कुछ समय में इसका सबसे बड़ा उदहारण तेल की खरीद को लेकर है. यूक्रेन युद्ध से पहले भारत अपनी जरूरत का सिर्फ 0.2 प्रतिशत तेल रूस से खरीदता था. यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर तरह तरह के प्रतिबन्ध लगा दिया जिससे रूस से निर्यात होने वाले तेल के दाम गिर गए, यानी बदले हुए हालात में रूस से भारत को सस्ता तेल मिल सकता था. अपने देश के फायदे के लिए मोदी सरकार ने ना तो अमेरिका और न ही ब्रिटेन समेत किसी भी यूरोपीय देश के दबाव में आये बिना रूस से तेल लेना शुरू किया और 0.2% से बढ़कर ये हिस्सेदारी अब लगभग 10% तक पहुंच गई है.

भारत की मित्रता अमेरिका से ज़रूर है लेकिन भारत अमेरिका का पिछलग्गू नहीं है. दुनिया के दो देश रूस और ईरान जिनसे अमेरिका सबसे ज्यादा चिढ़ता है, भारत के मित्र हैं, ना केवल उनके साथ भारत का व्यापार है बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी है. बकौल विदेश मंत्री एस जयशंकर “हम उस स्तर पर पहुंच गए हैं जहां हमें अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए जितना हो सके सभी के साथ संबंध बनाए रखना चाहिए क्योंकि आगे बढ़ने के लिए भारत की प्रगति एक तरह से हमारे लिए मानदंड बन जाती है”.

सशक्त भारत
सॉफ्टपॉवर के नाम से मशहूर भारत के इस शक्तिशाली रुख के पीछे एक मज़बूत राजनैतिक नेतृत्व और बढ़ती हुई आर्थिक शक्ति है. भारत की GDP का 13.5 फीसदी की दर से बढ़ना, भारत का दुनिया की सबसे मज़बूत पांच अर्थव्यस्थाओं में होना बता रहा है कि भारत एकदम सही रास्ते पर है. कोरोना का जनक चीन जहां मंदी में फंसा हुआ है वहीं रूस यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझा हुआ है जिसका असर पूरे यूरोप पर भी है. इसीलिए क्रय विक्रय के लिए भारतीय बाज़ार की ओर आज पूरी दुनिया नज़रे गड़ाये हुए है और ये रूतबा तो अभी और बढ़ेगा.

भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग की जारी एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2029 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है. दुनिया समझ चुकी है कि भारत अब क्षेत्रीय खिलाड़ी नहीं बल्कि दुनिया का अगुआ बन रहा है. अगले साल इसी सितम्बर के महीने में भारत दुनिया के 20 सबसे शक्तिशाली देशों के समूह जी20 की मेजबानी करने वाला है. साथ ही अगले साल SCO का सम्मलेन भी भारत में ही होने जा रहा है. समरकंद में ही भारत को sco का अगला अध्यक्ष बना दिया गया है. ये सारे घटनाक्रम दुनिया में भारत की मजबूती को दिखाते हैं.

दो आपसी दुश्मन भी हमारे दोस्त
आज भारत ने एक ही समय में अमेरिका को एंगेज करके, चीन को मैनेज करके और रूस को आश्वस्त करके रखा हुआ है. अमेरिका और रूस में नहीं बनती, लेकिन दोनों हमारे दोस्त हैं. इजरायल और खाड़ी देशों में नहीं बनती लेकिन दोनों हमारे दोस्त हैं. इराक़ और ईरान में नहीं बनती लेकिन दोनों हमारे दोस्त हैं. और तो और तालिबान भी कह रहा है कि पाकिस्तान हमारे और भारत के संबंध ख़राब करने की कोशिश करता है. ध्यान देने वाली बात ये है कि तालिबान को अफगानिस्तान में वापस जमाने में पाकिस्तान अपना बड़ा रोल मानता है फिर भी भारत के मुद्दे पर तालिबान गाहे बगाहे पाकिस्तान को डपटता रहता है.

प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट नीति है कि भारत एक दोस्त के लिए दूसरे दोस्त की उपेक्षा नहीं करेगा. अमेरिका और यूरोपीय देशों की अपील के बावजूद भारत ने सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ मतदान नहीं किया था. भारत ना तब युद्ध के पक्ष में था ना आज लेकिन रूस विरोधी किसी भी मोर्चे से भारत अलग ही रहा. प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के साथ जिस तरह संबंध स्थापित किये वो उनकी विदेश नीति का सबसे बड़ा उदाहरण है. एक ज़माने में माना जाता था कि इजरायल के किसी सामान्य नेता से भी मुलाक़ात करने से अरब देश भड़क जायेंगे और सम्बन्ध समाप्त कर लेंगे पर मोदी मैजिक में ना केवल भारत और इजरायल के प्रधानमंत्री एक दूसरे के देश आये गए बल्कि व्यापारिक सम्बन्ध भी स्थापित हुए. खास बात ये है कि इसके बावजूद अरब देशों से सम्बन्ध ना केवल बरकरार हैं बल्कि और भी मज़बूत हुए हैं.

शत्रु भी कर रहा है प्रशंसा
प्रधानमंत्री मोदी के कद और उनकी नीतियों की प्रशंसा वो पाकिस्तान भी कर रहा है जो अपने जन्मदिन से ही भारत विरोधी रहा है. प्रधानमंत्री रहते हुए इमरान खान ने इस्लामाबाद की रैली में कहा था कि “मैं हिंदुस्तान को उनकी विदेश नीति के लिए दाद दूंगा, उनकी विदेश नीति हमेशा स्वतंत्र और अपने लोगों के लिए रही है. वो अपनी विदेश नीति की रक्षा करते हैं”. विपक्ष में आने के बाद तो इमरान अपनी रैलियों में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के वीडिओ तक चलाते हुए कह रहे हैं कि “अमेरिकी चेतावनी के बावजूद भारत ने अपने लोगों की जरूरत को देखते हुए रूस से सस्ता तेल लिया और अमेरिका समेत पूरी दुनिया को दिखा दिया कि एक असल आज़ाद मुल्क क्या होता है.” कल्पना कीजिये कि पाकिस्तान के नेता की रैली और उसमें भारत की तारीफ का वीडिओ- ये है प्रधानमंत्री मोदी का जलवा.

अभी कुछ ही दिनों पहले विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि “2047 में जो भी भारत का विदेश मंत्री होगा उससे मुझे ईर्ष्या होगी, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश मंत्री होना बड़ी ताकत है.”. इस ताकत के पीछे है प्रधानमंत्री मोदी का क्लीयर विजन, उनकी मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और भारत की जनता का उनमें विश्वास, जिसे दुनिया पहचान भी रही है और मान भी रही हैं.

Tags: Narendra modi, PM Modi

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