Pithoragarh: कीवी की खेती से बदल रही उत्तराखंड के किसानों की 'तकदीर', जानें कैसे KVK कर रहा मदद

रिपोर्ट: हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को फलों का बाग कहा जाता है, क्योंकि यहां की जलवायु रसीले फलों के लिए काफी अनुकूल है. वहीं, पहाड़ों के ठंडे मौसम में किसान विभिन्न प्रकार के फलों का उत्पादन कर अपना आजीविका चलाते हैं. जबकि पिछले कुछ समय से यहां पर कीवी की पैदावार देखने को मिल रही है और किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.

दरअसल न्यूजीलैंड का कीवी फल पिथौरागढ़ के किसानों की किस्मत बदलने वाला साबित हो रहा है. वहीं, पिथौरागढ़ जनपद में कीवी उत्पादन के लिए उपयुक्त जलवायु है. हालांकि इस तरह का मौसम उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में खेती घटने का मुख्य कारण भी है. कीवी की फसल के लिए अच्छी बात यह है कि जंगली-जानवर भी इसको नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. वहीं, जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां भी यह फल आसानी हो जाता है. बस इसके लिए सटीक जानकारी और लगाने का तरीका होना चाहिए. जबकि पिथौरागढ़ का कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra, Gaina Pithoragarh) जनपद के किसानों को पूरी मदद कर रहा है.

पिथौरागढ़ में हो रहा 6 तरह के कीवी का उत्‍पादन
बहरहाल, गैना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कीवी के उत्पादन के अनेक प्रयोग किये गए. इसके बाद 1 नाली क्षेत्रफल में कीवी की खेती की गई. इस साल 3 कुंतल से ज्यादा कीवी का उत्पादन हुआ है और कृषि विज्ञान केंद्र इसे बाजार में 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और फार्म मैनेजर डॉ. डीके चौरसिया ने पिथौरागढ़ में कीवी उत्पादन की संभावनाओं के बारे में न्यूज़ 18 लोकल को बताया कि पिथौरागढ़ कीवी उत्पादन का हब बन सकता है. यहां की जलवायु कीवी के लिए काफी उत्तम है. यही नहीं, उन्‍होंने अभी तक 6 प्रकार की कीवी का उत्पादन किया है.

चौरसिया ने कीवी के फायदे बताते हुए कहा कि वह जनपद के किसानों के लिए कीवी की पौध भी बना रहे हैं, जो जनवरी महीने के बाद किसानों और काश्तकारों को मिल सकेगी. इसके साथ कीवी उगाने के लिए जरूरी चीजों के बारे में भी वह लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिससे जनपद के ज्यादा से ज्यादा लोग कीवी उत्पादन से जुड़कर अपनी आय को आसानी से बड़ा सकते हैं. कीवी के फल में ऑक्सीडेंट की मात्रा भरपूर होती है जो शरीर को कई बीमारियों से दूर रखता है. इस कारण बाजार में इसकी डिमांड रहती है और कीमत ज्यादा मिलती है. यह पिथौरागढ़ के किसानों के लिए निसंदेह ही फायदे का सौदा है.

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