Pithoragarh: सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज का नहीं छूट रहा विवादों से नाता, अब मढ़धूरा के ग्रामीणों ने लगाया ये आरोप

रिपोर्ट: हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के छात्रों को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के मकसद से बनाया गया सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण के बाद से ही विवादों में रहा है. कुछ समय पहले एडमिशन न होने को लेकर विवाद थमा ही था कि अब मढ़धूरा के ग्रामीणों ने इंजीनियरिंग कॉलेज के संचालन को लेकर नाराजगी जताई है. दरअसल पिथौरागढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेज की अपनी कोई स्थायी बिल्डिंग नहीं थी, जिसे देखते हुए शहर से लगे हुए गांव मढ़धूरा में 200 नाली जमीन पर 16 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन का निर्माण हुआ. एक महीने यहां कक्षाएं भी संचालित हुईं, लेकिन उसके बाद यहां तमाम खामियां नजर आने लगीं और फिर से इंजीनियरिंग कॉलेज अपनी अस्थायी बिल्डिंग में आ गया.

मढ़धूरा के ग्रामीणों ने उनके साथ धोखा करने का आरोप लगाया है. यहां के पूर्व प्रधान पुष्कर सिंह मेहता ने कहा कि गांव के विकास के लिए उन्हें इस इंजीनियरिंग कॉलेज से उम्मीद थी, जिसके लिए उन्होंने अपनी जमीन प्रशासन को दी, लेकिन प्रशासन ने बिना उन्हें कुछ बताए इंजीनियरिंग कॉलेज का संचालन यहां बंद कर दिया और 16 करोड़ रुपये के साथ ही उनकी जमीन भी बर्बाद चली गई. उन्होंने प्रशासन पर उन्हें अंधेरे में रखने का आरोप लगाया है.

पिथौरागढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण अब जीआईसी स्कूल की जमीन पर होना तय हुआ है, जिसका विरोध भी यहां के लोग कर रहे हैं. कॉलेज निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृत हो चुकी है. इन सब कारणों ने जिला प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है.

इस विषय पर जब पिथौरागढ़ की जिलाधिकारी रीना जोशी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्लाइड जोन होने के कारण मढ़धूरा में बना इंजीनियरिंग कॉलेज सुरक्षित नहीं है. उन्होंने इस विषय पर मौके पर जाकर ग्रामीणों से बात करने की बात कही है.

अब इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि निर्माण से पूर्व यहां की भौगोलिक स्थिति के बारे में क्यों नहीं सोचा गया और 16 करोड़ रुपये खर्च भी कर डाले. इन सब कारणों से यहां पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य पर भी गहरा असर पड़ रहा है.

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