PLA का अड़ियल रवैया बढ़ा रहा मुश्किलें! भारत-चीन फिर करेंगे चर्चा, हॉट स्प्रिंग्स पर रहेगा ध्यान

नई दिल्ली. 13वें दौर की कमांडर स्तर की बैठक के बाद भारत (India) और चीन (China) वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कॉर्डिनेशन (WMCC) की एक और मीटिंग के लिए तैयार हो गए हैं. खबर है कि इस बार चर्चा के सबसे बड़े मुद्दों में हॉट स्प्रिंग्स (Hot Springs) शामिल रहेगा. दोनों पक्ष इस नई बैठक के लिए तैयार हो गए हैं. हालांकि, अभी तक इसकी तारीख और समय तय नहीं किया गया है. भारत और चीन के बीच आखिरी वार्ता 10 अक्टूबर को हुई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देपसांग बल्ज और चार्डिंग नल्ला जंक्शन पर भारतीय सेना के गश्ती के अधिकार को बहाल करने में नई दिल्ली और बीजिंग के अधिकारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इसका एक बड़ा कारण पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अड़ियल रवैये को माना जा रहा है. WMCC का नेतृत्व दोनों देशों को अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी करते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, यह माना जाता है कि 13वें दौर की बैठक में पीएलए ने हॉट स्प्रिंग्स में डिसइंगेजमेंट की परेशानी को सुलझान में अपर्याप्त उपायों का सहारा लिया. चीना सेना ने अपने स्थाई बेस पर लौटने या अप्रैल 2020 जैसी स्थिति दोबारा बहाल करन से इनकार कर दिया. मई 2020 में पीएलए ने बड़ी संख्या में जवानों का इस्तेमाल कर पूर्वी लद्दाख में पैंगॉन्ग त्सो को उत्तरी किनारों, गलवान, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स में स्थिति को एकतरफा बदल दिया था. चीन ने यह कदम खारिज की गई 1959 लाइन को लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ लागू करने की कोशिश में उठाया था.

जैसा की भारत और चीन की पिछली बैठकों में तय किया गया था. तनाव को खत्म करने के लिए पीएलए ने आधे-अधूरे तरीके से हॉट स्प्रिंग्स में अपनी मौजूदा जगह से पीछे हटने का फैसला किया है, लेकिन सेना ने अपने स्थाई बेस पर लौटने से इनकार कर दिया है. भारतीय सेना की तरफ से इस प्रस्ताव को खारिज किया गया था और हॉट स्प्रिंग्स सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के स्थाई बेस पर वापस लौटने की बात पर जोर दिया गया था.

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चीनी जानकारों का मानना है कि हॉट स्प्रिंग्स में डिसइंगेजमेंट के लिए पीएलए की धीमी कार्रवाई जारी रहेगी. साथ ही देपसांग बल्ज और सीएनजी इलाके में गश्ती के अधिकार को बहाल करने के लिए उसे और मनाने की जरूरत होगी. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पक्ष भी कोई जल्दबाजी में नहीं है. पहले की तरह समझौते के समाधान के बजाए मोदी सरकार LAC पर कानूनी दावा करने से पीछे नहीं हटेगी. भले ही लद्दाक LAC से डिसइंगेजमेंट और डिएस्केलेशन पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन भारती सेना की नजरें केंद्रीय और पूर्वी मोर्चों पर बनी हुई है और सेना 3488 किमी की LAC पर किसी भी उल्लंघन का सामना करने के लिए तैयार है.

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