West Champaran: वेट लिफ्टिंग छोड़ कमलेश बन गए किसान, अब खेतों में उगा रहे शुगर फ्री धान

बेतिया. अपने रंग-बिरंगी कई सब्जियों एवं फलों को देखा होगा, लेकिन क्या अपने कभी रंग-बिरंगे गेहूं तथा धान देखा है. ऐसे चावल जो प्राकृतिक रूप से हरे, नीले, लाल व काले हों, तथा जिनमें कच्चे आम का स्वाद हो. नहीं, तो आज न्यूज़ 18 लोकल आपको दिखाएगा और बताएगा भी कि इसकी उपज कहां हो रही है. बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के किसान कमलेश सिर्फ कलरफुल चावल ही नहीं, बल्कि रंग-बिरंगे गेहूं की भी खेती कर रहे हैं. नरकटियागंज प्रखंड अंतर्गत मुशहरवा गांव निवासी और किसी समय जिलास्तरीय वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर आने वाले कमलेश ने खुद भी नहीं सोचा था कि वो बिहार के किसानों के लिए आदर्श साबित होंगे.

कमलेश बताते हैं कि वो पहले वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेते थे. लेकिन उनके पिता का अचानक निधन हो गया तो उन्हें अपना यह शौक छोड़ना पड़ा और उन्होंने खेती करना शुरू कर दिया. उन्होंने छोटी सी जगह पर रंगीन धान और गेहूं की सफल खेती की. इनमें काला, लाल, हरा तथा नीला चावल से लेकर काला, लाल, नीला तथा सिंधु घाटी सभ्यता के समय उगाए जाने वाला सोनामती गेहूं तक शामिल है. साथ ही अंबे मोहर नामक धान की एक ऐसी वेराइटी जो कच्चे आम के स्वाद से भरपूर है. इसे लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं. खास बात है कि जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले कमलेश ने हरियाणा, गुजरात, और मध्य प्रदेश से बीज लाकर रंगीन अनाज को ऑर्गेनिक तरीके से अपने यहां उपजाया है.

शुगर फ्री और पौष्टिकता से भरपूर हैं यह अनाज

कमलेश ने बताया कि उन्होंने इन रंग-बिरंगे धान और गेहूं उपजाने के बाद कृषि वैज्ञानिक केंद्र में इसकी जांच कराई. जांच में सामने आया कि यह रंग-बिरंगे चावल पूरी तरह से शुगर फ्री हैं. चावल होने के बावजूद भी इनमें कार्बोहाइड्रेट यानी शुगर की मौजूदगी नहीं है. साथ ही यह अन्य चावल तथा गेहूं की तुलना में ज्यादा पौष्टिक हैं. इन रंग-बिरंगे चावल तथा गेहूं की कीमत 150 से 200 रुपए प्रति किलो तक है.

इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए कमलेश कई क्विंटल गेहूं और धान मुफ्त में अन्य किसानों में बांट चुके हैं. वो खुद अब इसे बड़े पैमाने पर उपजाने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में उन्हे सरकार से आर्थिक सहायता की उम्मीद है, ताकि वो वृहद रूप में एक से बढ़कर एक चीजों की खेती कर चंपारण जिले के इस क्षेत्र को संपन्न बना सकें.

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FIRST PUBLISHED : January 23, 2023, 13:32 IST

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