नोएडा:गांव से निकलकर युवा खिलाड़ी शिवम ने विदेशों में गोल्ड मेडल जीत कर बढ़ा रहें है भारत का मान

<b>नोएडा</b>: कहा जाता है, सोना जितना तपता है वह उतना ही खरा होता जाता है. इस कहावत को सच साबित करने वाले कई उदाहरण है, उनमें से एक है ग्रेटर नोएडा में रह रहे शिवम ठाकुर.मां सीता की जन्मस्थली बिहार का छोटा सा जिला सीतामढ़ी जिसके बारे में गूगल को भी कुछ खास पता नहीं है, उस जगह से निकल कर देश विदेश में शिवम ठाकुर (Shivam Thakur shooter) क्वांटी गेम्स में मेडल ला रहें हैं और देश का मान बढ़ा रहे हैं.

<b>शूटिंग महंगा खेल है, शुरुआत में मुश्किल आती है</b>
मूलतः बिहार के एक छोटे से गांव के रहने वाले शिवम ठाकुर ग्रेटर नोएडा में रहते हैं और यही से उन्होंने खेलने की ट्रेनिंग ली है. शिवम बताते हैं कि शूटिंग बहुत महंगा खेल है. इसके लिए पिस्टल और अन्य चीजे विदेश से मंगवाना पड़ता है.मेरे पिता जी ने भी बहुत मुश्किल से मुझे ट्रेनिंग दिलाई है. स्पोंसर के बारे में पूछने पर वो बताते हैं कि भारत में क्रिकेट के अलावा जितने भी गेम है उनको लोग ज्यादा महत्व नहीं देते हैं जिस कारण स्पोंसर मिलने भी भी खिलाड़ियों को दिक्कत होती है.
<b>अब स्थिति सुधर रही है, नहीं तो लोग क्रिकेट के अलावा कुछ जानते नहीं थे.</b>
विश्व में अलग अलग स्थानों पर चार गोल्ड और 2 सिल्वर मेडल जीत चुके शिवम बताते हैं कि अब देश में स्थिति काफी बदल गई है. नहीं तो पहले लोग ज्यादा खेल के बारे में जानते भी नहीं थे. लेकिन जब से लोग देश विदेश में मेडल जीतने लगे हैं तो सरकार भी और देश की जनता भी आगे आकर हमें सपोर्ट करने लगी है. जैसे अभी नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में गोल्ड जीता तो उसके बाद कई लोग अपने बच्चो आप इस खेल में भेजना चाहते हैं. ऐसे ही कुश्ती और कबड्डी के साथ हुआ लोग. ऐसे में हम खिलाड़ियों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है कि हम ज्यादा से ज्यादा मेडल लाए तभी देश में लोग उस खेल के बारे में जागरूक होंगे और उस से देश का भी नाम होगा.

<b>नए बच्चो को आगे बढ़ाया जाना चाहिए</b>
अभी नेपाल में क्वांटि गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर आने वाले शिवम कहते हैं कि अभी जो छोटे बच्चे है उनको खेल में रुझान लाना चाहिए. उनके अंदर बहुत कुछ करने और सीखने की क्षमता होती है. अगर उनके परिवार साथ दे तो बच्चो को दुनियां जितने में कोई नहीं रोक सकता. वो कहते हैं मेरी मां ने मुझे बहुत सपोर्ट किया, पहले मैं क्रिकेट खेलता था लेकिन मुझे चोट लगने के कारण वो मुझे छोड़ना पड़ा. लेकिन आज मैं खुश हूं, देश के लिए मेडल लाया हूं खेल चाहे वो कोई भी हो.

<b>(रिपोर्ट – आदित्य कुमार)</b>

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